Featured

देश के लिये पदक लाने वाली रेखा मेहता की प्रेरणादायी कहानी

उधम सिंह नगर के तिलपुरी गांव की 32 साल की पैरा-एथलीट रेखा मेहता का सपना भारत का प्रतिनिधित्व करने का था लेकिन आर्थिक तंगी ने उनके इस सपने को लगभग छीन लिया था. प्रतिभा होने के बावजूद, उनके पास कंबोडिया में होने वाली पहली एशियाई पैरा थ्रोबॉल चैंपियनशिप के लिए पैसे जुटाने की कोई राह नजर नहीं आ रही थी. जब सब कुछ खत्म सा लग रहा था, तभी कुछ लोगों ने आगे बढ़कर उनकी मदद की और उनके सपने को सच करने में योगदान दिया.
(Rekha Mehta Uttarakhand US Nagar)

इन मददगारों के सहयोग से रेखा ने चेन्नई से कंबोडिया के लिए उड़ान भरी और पिछले गुरुवार की रात वहां पहुंचीं. चैंपियनशिप में नेपाल, मलेशिया, थाईलैंड और मेजबान कंबोडिया सहित पांच टीमों के खिलाफ मुकाबला था. रेखा ने शानदार प्रदर्शन किया और भारत को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

परिवार की जिम्मेदारी रेखा के कंधों पर

रेखा के पिता एक ऑटो चालक थे, जिनका कुछ साल पहले निधन हो गया था. अब वह अपने परिवार की इकलौती कमाने वाली सदस्य हैं. वह एक आंगनवाड़ी केंद्र में सहायिका के तौर पर काम करती हैं. इस नौकरी से मिलने वाली मामूली आय से वह अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं. इसके बावजूद, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने खेल के प्रति समर्पण बनाए रखा.

अपनी जीत पर खुशी जाहिर करते हुए रेखा ने उन्होंने कहा कि सबके आशीर्वाद और सहयोग से मैं यहां तक पहुंची और अपने देश का गर्व से प्रतिनिधित्व कर पाई. मैं अपने परिवार और गांव वालों की शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया.

कास्य पदक के साथ रेखा मेहता

सपनों के पीछे की मेहनत

रेखा की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है. एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना आसान नहीं था. पैरा-एथलीट होने के नाते उन्हें शारीरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा. लेकिन उनकी लगन और जज्बे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी. थ्रोबॉल जैसे खेल में महारत हासिल करने के लिए उन्होंने दिन-रात अभ्यास किया. आंगनवाड़ी में काम करने के बाद बचे हुए समय में वह अपने खेल को निखारती थीं. जब कंबोडिया में चैंपियनशिप की बात आई, तो रेखा के सामने सबसे बड़ी समस्या पैसे की थी. यात्रा का खर्च, उपकरण और अन्य जरूरतों के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे. परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे उनकी मदद कर पाते. गांव में भी ज्यादातर लोग सीमित आय पर गुजारा करते हैं, इसलिए वहां से भी ज्यादा उम्मीद नहीं थी. रेखा ने कई जगह मदद मांगी, लेकिन शुरुआत में कोई ठोस जवाब नहीं मिला.
(Rekha Mehta Uttarakhand US Nagar)

जब रेखा का सपना टूटता नजर आ रहा था, तभी कुछ लोग उनकी कहानी से प्रभावित हुए. ये लोग न तो कोई बड़ी हस्ती थे और न ही उनके पास असीमित धन था, लेकिन उनका दिल बड़ा था. उन्होंने आपस में चंदा इकट्ठा किया और रेखा के लिए जरूरी राशि जुटाई. किसी ने उड़ान का खर्च उठाया, तो किसी ने उनके रहने-खाने की व्यवस्था में मदद की. इस तरह, छोटे-छोटे योगदानों से रेखा का रास्ता साफ हुआ.

मदद के लिये स्थानीय दैनिक अख़बार भी नहीं रहे पीछे

कंबोडिया पहुंचने के बाद रेखा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ मुकाबले में हिस्सा लिया. भारत की टीम में उनकी मौजूदगी ने टीम का हौसला बढ़ाया. नेपाल, मलेशिया और थाईलैंड जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. आखिरकार, कंबोडिया के खिलाफ हुए मुकाबले में भारत ने तीसरा स्थान हासिल किया और कांस्य पदक अपने नाम किया. यह जीत सिर्फ रेखा की नहीं, बल्कि उन सभी की थी, जिन्होंने उनके सपने को सच करने में साथ दिया.

रेखा की इस उपलब्धि से तिलपुरी गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. उनके परिवार और पड़ोसियों ने इसे अपनी जीत माना. गांव के लोग, जो पहले रेखा के खेल को गंभीरता से नहीं लेते थे, अब उनकी तारीफ करते नहीं थकते. टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में छपी एक रपट में रेखा की मां ने कहा कि मेरी बेटी ने जो किया, वह हमारे लिए गर्व की बात है. उसने दिखा दिया कि मेहनत और हिम्मत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है.

पदक जीतने के बाद आने गांव में रेखा मेहता

रेखा की कहानी उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को छोड़ना नहीं चाहते. यह कहानी यह भी दिखाती है कि समाज का छोटा सा योगदान किसी की जिंदगी बदल सकता है. अगर रेखा को यह मौका नहीं मिलता, तो शायद उनकी प्रतिभा दुनिया के सामने नहीं आ पाती. उनके समर्थकों ने न सिर्फ एक एथलीट की मदद की, बल्कि देश के लिए एक पदक भी सुनिश्चित किया.
(Rekha Mehta Uttarakhand US Nagar)

रेखा अब भविष्य की तैयारियों में जुट गई हैं. उनका अगला लक्ष्य और बड़ी चैंपियनशिप में हिस्सा लेना और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है. वह चाहती हैं कि सरकार और खेल संगठन पैरा-एथलीट्स को ज्यादा सहयोग दें, ताकि आर्थिक तंगी किसी के सपनों के आड़े न आए. रेखा का मानना है कि अगर सही संसाधन और प्रोत्साहन मिले, तो भारत के पैरा-एथलीट दुनिया में नाम रोशन कर सकते हैं.

रेखा मेहता की यह यात्रा साहस, मेहनत और सामुदायिक समर्थन की मिसाल है. एक छोटे से गांव की लड़की ने न सिर्फ अपने परिवार का नाम ऊंचा किया, बल्कि देश को गर्व करने का मौका दिया. उनकी कहानी हमें सिखाती है कि मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों और साथ देने वाले लोग हों, तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है.

काफल ट्री डेस्क

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

Vodka онлайн казино – обзор

Vodka онлайн казино - обзор ▶️ ИГРАТЬ Содержимое Преимущества Vodka Онлайн КазиноНедостатки Vodka Онлайн КазиноВход…

5 hours ago

Пин Ап казино – Официальный сайт Pin up играть онлайн | Зеркало и вход

Пин Ап казино - Официальный сайт Pin up играть онлайн | Зеркало и вход ▶️…

5 hours ago

Олимп казино официальный сайт в Казахстане – Olimp Casino

Олимп казино официальный сайт в Казахстане - Olimp Casino ▶️ ИГРАТЬ Содержимое Преимущества игры в…

2 days ago

Guide du bonus 1xbet APK – conditions de mise, bonus de bienvenue et retraits

Qu’est‑ce que le 1xbet APK ?Télécharger et installer le 1xbet APK en toute sécuritéCréation de…

2 days ago

Betify Casino en Ligne | Jouez sur Betify avec 1000 €

Betify Casino en Ligne | Jouez sur Betify avec 1000 € ▶️ JOUER Содержимое Betify…

2 days ago

Polskie kasyna online z darmowymi spinami dla nowych graczy

Polskie kasyna online z darmowymi spinami dla nowych graczy ▶️ GRAĆ Содержимое Jak wybrać najlepsze…

2 days ago