उत्तराखंड की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी (Bhuvan Chandra Khanduri) का निधन हो गया है. वे 91 वर्ष के थे. ‘जनरल साहब’ के नाम से मशहूर खंडूरी ने अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से उत्तराखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है.
खंडूरी के परिवार में उनकी पत्नी अरूणा, बेटा मनीष और बेटी रितु खंडूरी भूषण हैं. रितु खंडूरी भूषण ने जानकारी दी कि उनके पिता ने सुबह करीब 11 बजे अंतिम सांस ली. राजनीति में सुशासन और ईमानदारी की मिसाल पेश करने वाले खंडूरी अपनी अनुशासनप्रिय प्रशासनिक शैली के लिए जाने जाते थे.
सैन्य जीवन से सेवानिवृत्त होने के बाद सक्रिय राजनीति में आए भुवन चंद्र खंडूरी दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे. साल 2007 में जब प्रदेश में भाजपा सत्ता में आई, तो उन्हें कमान सौंपी गई. हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी पांच सीटों पर पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. बाद में, उनकी साफ-सुथरी और बेदाग छवि को देखते हुए भाजपा ने 2011 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें फिर से राज्य का मुख्यमंत्री बनाया.
खंडूरी के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि 1 नवंबर 2011 को उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक पारित कराना रहा. उस समय इसे देश के सबसे सशक्त और व्यापक लोकायुक्त कानूनों में गिना गया. इस कानून में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद और विधायकों को भी जांच के दायरे में लाया गया था, जिसे भारतीय राजनीति में एक साहसिक और ऐतिहासिक कदम माना गया.
‘नो-नानसेंस’ नेता की छवि रखने वाले खंडूरी भ्रष्टाचार के खिलाफ बेहद सख्त थे. प्रशासनिक अनुशासन स्थापित करने के लिए उन्होंने कई कड़े फैसले लिए. नियमों के पालन में वे किसी प्रकार की ढील के पक्षधर नहीं थे, जिसके कारण शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत हुई.
खंडूरी के निधन पर देश की सर्वोच्च हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक्स पर लिखा, ‘उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बीसी खंडूड़ी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है. भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवा देने के बाद उन्होंने जन सेवा के लिए ईमानदारी, सादगी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया.’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेवानिवृत्त) जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत में उन्होंने बहुमूल्य योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा. उत्तराखंड के विकास के लिए वे हमेशा समर्पित रहे.’ पीएम ने केंद्रीय मंत्री के रूप में कनेक्टिविटी बेहतर करने के उनके प्रयासों को भी याद किया.
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, ‘उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा एवं सुशासन के उच्च आदर्शों के प्रति समर्पित किया. उत्तराखंड की विकास यात्रा में उनका योगदान और केंद्र सरकार में सड़क परिवहन मंत्री के रूप में उनकी भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी.’
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया. उन्होंने लिखा, ‘श्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया. राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई. उन्होंने अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया.’
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