हैडलाइन्स

नेशनल रिकार्ड बनाने वाली पहाड़ की बेटी की तस्वीरें

असम में चल रही 37वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान बीते रविवार उत्तराखंड की मानसी नेगी ने महिला वर्ग की दस हजार मीटर वाक रेस में स्वर्ण पदक जीता. मानसी नेगी का स्वर्ण पदक इस वजह से और ख़ास है क्योंकि उन्होंने एक नया रिकार्ड भी कायम किया. 47:30:94 मिनट में दौड़ पूरी कर मानसी ने नेशनल मीट रिकार्ड अपने नाम किया.
(Mansi Negi Chamoli Uttarakhand)

स्वर्ण पदक जीतने के बाद मानसी नेगी ने फेसबुक पर तस्वीरें साझा करते हुये सभी को धन्यवाद कहते हुये लिखा-

Success is not Accident it in hard work perseverance learning studying sacrifice and most of all love of what you are doing or learning to do…

मानसी नेगी सीमांत जिले चमोली के मजीठा गांव की रहने वाली हैं. मजीठा गांव दशोली विकासखंड में पड़ता है. वर्तमान में मानसी महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज एक्सीलेंस विंग की एथलीट हैं. मानसी महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज की एक्सीलेंस विंग के कोच अनूप बिष्ट से प्रशिक्षण ले रही हैं.  
(Mansi Negi Chamoli Uttarakhand)

मानसी नेगी के अतिरिक्त 37वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रविवार को उत्तराखंड के हिमांशु कुमार ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया. हिमांशु कुमार ने पांच हजार मीटर वाक रेस में स्वर्ण पदक अपने नाम किया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी.    
(Mansi Negi Chamoli Uttarakhand)

स्वर्ण पदक जीतने के बाद मानसी नेगी द्वारा अपनी फेसबुक वाल पर साझा तस्वीरें देखिये. सभी तस्वीरें मानसी नेगी की फेसबुक वाल से साबह्र ली गयी हैं-

काफल ट्री डेस्क

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

2 weeks ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

2 weeks ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

2 weeks ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

2 weeks ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

2 weeks ago