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दो भारतीयों को मैग्सेसे पुरस्कार

इस साल रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की लिस्ट छह लोगों में से में दो भारतीयों का भी नाम शामिल है. डॉक्टर भारत वटवानी और सोनम वांगचुक को अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया जा रहा है. रैमन मैग्सेसे पुरस्कार की स्थापना अप्रैल 1957 में हुई थी. यह पुरस्कार फिलीपींस के दिवंगत राष्ट्पति रैमन मैग्सेसे की याद में दिया जाता है. रैमन मैग्सेसे पुरस्कार एशिया का प्रमुख और सर्वोच्च सम्मान वाला पुरस्कार है. फिलीपींस के मनीला शहर में फिलीपींस के बेहद सम्मानित राष्ट्रपति जिनके आदर्शों ने इस पुरस्कार की नींव डाली, के जन्म दिवस 31 अगस्त को, एक औपचारिक समारोह में प्रदान किया जाता है. यह पुरस्कार 6 श्रेणियों में दिया जाता है.

डॉ. भारत वटवानी को हजारों मानसिक रूप से बीमार गरीबों के इलाज के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों को लेकर सम्मानित किया गया. जबकि, सोनम वांगचुक को प्रकृति, संस्कृति और शिक्षा की दिशा में उनके योगदान को लेकर पुरस्कृत किया गया. रमन मैग्सेसे अवार्ड फाउंडेशन ने इस मौके पर विजेता के लिए दिए प्रशस्ति पत्र में वाटवानी के कार्यों का उल्लेख किया. मुंबई के वाटवानी और उनकी पत्नी ने सड़कों पर रहने वाले मानसिक रूप से बीमार लोगों को इलाज के लिए उनके निजी क्लिनिक पर लाने का अभियान शुरू किया जिसके चलते उन्होंने 1988 में श्रद्धा रिहेब्लिटेशन फाउंडेशन स्थापित किया. इसका उद्देश्य सड़कों पर रह रहे मानसिक रूप से बीमार लोगों को बचाना, उन्हें निशुल्क आवास, भोजन और मनोचिकित्सा मुहैया कराना और उन्हें उनके परिवारों से फिर से मिलाना है.

सोनम वांगचुक एक लद्दाखी अभियंता, अविष्कारक और शिक्षा सुधारवादी हैं. फिल्म ‘3 इडियट्स’ में आमिर खान वाला ‘फुनशुक वांगड़ू’ का किरदार काफी हद तक इंजीनियर और इनोवेटर वांगचुक के जीवन पर ही आधारित था. 1988 में अपनी इंजीनियरिंग डिग्री हासिल हासिल की वे लद्दाख में छात्रों के एक समूह द्वारा 1988 में स्थापित स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीओएमएल) के संस्थापक-निदेशक भी हैं. इन्हें सुदूर उत्तर भारत में शिक्षा प्रणाली में उनके अनोखे व्यवस्थित, सहयोगपूर्ण और सामुदायिक सुधार के लिए जाना जाता है, जिससे लद्दाखी युवाओं की जिंदगियों में सुधार आया.

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