प्रतीकात्मक तस्वीर
20 अप्रैल को उत्तराखंड सरकार की नई गाइडलाइंस के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में दोपहर 2 बजे बाज़ार बंद करने का फरमान जारी हुआ. दिन के डेढ बजे से ही पुलिस की गाड़ियां सड़कों पर ‘सामान समेटो, सामान समेटो’ हुंकारती फिरने लगती हैं. सरकारी खौफ़ इस कदर की बेचारे कारोबारी 2 बजे से पहले-पहले ही अपनी दुकान का शटर गिरा देते हैं. चाय की दुकान बंद, फल का ठेला बंद, सब्जी की दुकान बंद, कपड़े की दुकान बंद, आटे की दुकान बंद पर शराब की दुकान धड़ल्ले से खुलती है.
(Liquor Shops in Uttarakhand)
उत्तराखंड सरकार की पुलिस की एक आवाज पर आम कारोबारियों के शटर तो गिर गये पर उनकी आवाज शराब कारोबारियों तक न पहुंच सकी. पहुंची भी तो इतनी धीमी की उन्होंने सरकार को 2 बजे तक दुकान खोलने का फरमान ख़ारिज कर नया फरमान जारी किया और कहा कि शराब 7 बजे तक बिकेगी. जाहिर है सरकार के राजस्व में शराब का जो भार है उसके सामने सरकार को झुकना ही था. कुल मिलाकर सरकार ने बिना कहे ही शराब को अति आवश्यकीय वस्तु में शामिल कर दिया.
सामजिक कार्यकर्ताओं का सवाल है कि क्या सरकार केवल शराब के अधिभार से ही चलती है? अन्य व्यापारी किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देते जब शराब व्यापारियों की बात सुनी जा रही है तो अन्य व्यापरियों की क्यों नहीं. सरकार के इस फैसले से कारोबारियों को करीब 4 घंटे काम-धंधे का मौका मिल रहा है. बाजार कम समय खुला होने से लोगों की भीड़ भी इस समय बढ़ने लगी है. कारोबारी बेचारे इस समय सोशियल डिस्टेंसिंग का पालन तक नहीं करवा पा रहे हैं जिस कारण उन्हें अधिक खतरा भी है. इसके बावजूद पेट के लिये उन्हें सबकुछ सहना पड़ रहा है.
बागेश्वर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, हल्द्वानी आदि जिलों के बाजारों में एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जो आस-पास के गावों से आता है. इन्हें बाज़ार पहुंचने में घंटे दो घंटे का समय लगता है. सुबह 10 बजे बाद ही इन शहरों के बाज़ार में हलचल शुरु होती है. ऐसे में यहां के कारोबारियों के पास दोपहर 2 बजे तक कारोबार करने का समय ही कितना बचता है.
(Liquor Shops in Uttarakhand)
उत्तराखंड में आबादी का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन से जुड़ा है जो स्वरोजगार करता है. सरकार भी स्वरोजगार को खूब बढ़ावा देती है पर पिछले एक साल में स्वरोजगार करने वालों की रीढ़ टूट गयी है. पहाड़ों में एडवेंचर स्पोर्ट्स वाले हों या छोटे छोटे होटल वाले उनके लिये सरकार ने पिछले एक साल में किसी भी तरह की कोई मदद नहीं की है.
दोपहर बाद बाज़ार बंद किये जाने पर पहले दिन से सवाल किये जा रहे हैं. जब देश के प्रधानमंत्री स्वयं कह चुके हैं कि लॉकडाउन की ओर न बड़ा जाय तब उत्तराखंड सरकार लगातार व्यापारियों की कमर तोड़ने वाले फैसले क्यों ले रही है. क्या यह संभव नहीं है कि सोशियल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुये दिन भर बाजार खोले जायें जिससे बाज़ार में सुबह के समय होने वाली भीड़ कम हो.
(Liquor Shops in Uttarakhand)
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