संस्कृति

उत्तराखंड में गाये जाने वाले निमंत्रण गीत

उत्तराखण्ड में पुराने समय में निमंत्रण देने के लिये एक व्यक्ति गांव के सबसे ऊंचे हिस्से पर जाता और वहाँ से आवाज लगाता कि अमुक दिन फलाने के लड़के या लड़की की शादी है या अन्य कोई कार्यक्रम है. (Invitation song of uttarakhand)

आवाज लगाने वाले व्यक्ति को अगर गांव में सभी लोगों को सपरिवार निमंत्रण देना होता तो वह कहता कि सभी को ‘चूल्हा न्यूत’ है वहीं अगर इसे परिवार के एक ही सदस्य के लिये निमंत्रण देना होता तो कहता ‘मौ आदिम’ को भात खाने का निमंत्रण है. शकुनाखर: मांगलिक अवसरों पर गाये जाने वाले गीत

अब तो मोबाइल में लोग शादी ब्याह के निमंत्रण मोबाइल में भेजते हैं. कोई वीडियो बनाता है, कोई फोटो बनाता है अपनी क्षमता के अनुसार सभी कुछ न कुछ कर निमंत्रण भेजते हैं. कुमाऊं में अन्नप्राशन संस्कार

मंगल कार्यों में निमंत्रण देने का, गीत गाने का रिवाज है. निमंत्रण तोते के माध्यम से दिया जाता है. तोते को शुभ माना जाता है इसलिए तोते के माध्यम से सभी को निमंत्रण दिया जाता है. 

मंगल कार्यों में गाया जाने वाला एक निमंत्रण गीत पढ़िये :

शुवा रे शुवा, वनखण्डी शुवा,
हरिया तेरो गात, पिंहली तेरो ठून,
रतनारी तेरी आखी, ललाड़ि तेरो खाप,
नजर तरी बांकी, दिआ शुवा नगरिन न्यूत दिआ.
गौं नी पहचान्यू, नौं नी जाणन्यूं मैं,
कै घर कै नारी न्यूत दिऊॅ?
सीता देई नौं छ, जनकपुर गौं छ,
तै स्वामी काणि रामचन्द्र नौ छ,
अघिल अघवाड़ी, पछिल फुलवाड़ी,
तू तै घर तै नारी न्यूत दिया.
गौं नी पहचान्यू, नौं नी जाणन्यूं मैं,
कै घर कै नारी न्यूत दिऊॅ?
राधा देई नौं छ, मथुरा तै को गौं छ,
तै स्वामी काणि श्रीकृष्ण नौ छ,
अघिल अघवाड़ी, पछिल फुलवाड़ी,
तू तै घर तै नारी न्यूत दिया.
गौं नी पहचान्यू, नौं नी जाणन्यूं मैं,
कै घर कै नारी न्यूत दिऊॅ?
शुभद्रा देई नौं छ, हस्तिनापुर गौं छ,
तै स्वा काणि अर्जुन नौ छ,
अघिल अघवाड़ी, पछिल फुलवाड़ी,
तू तै घर तै नारी न्यूत दिया.


इस गीत में घर के मुखिया और तोते के बीच का संवाद है. इन गीतों में जहां पहले देवताओं को निमंत्रण दिया फिर नाते रिश्तेदारों के नाम लिये जाते हैं फिर जिस घर में शुभ कार्य हो रहा है, उस घर की बेटियों को निमंत्रण दिया जाता है. (Invitation song of uttarakhand)

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