समाज

हल्द्वानी नगर का इतिहास

उत्तराखण्ड के कुमाऊं मण्डल का प्रवेश द्वार हल्द्वानी तब तक एक गांव ही था जब तक इसे व्यापारिक मंडी के रूप में बसाने की शुरुआत नहीं हुई थी. चंद शासनकाल में इसे गांव का ही दर्जा हासिल था. तब इस गांव में पर्वतीय क्षेत्रों के पशुपालक जाड़े काटने के लिए आया करते थे. (History of Haldwani City)

1881 तक यहां की आबादी मुख्यतः व्यापारियों की हुआ करती थी. 1834 में मि. ट्रेल ने इसे कुछ महीनों के लिए भाबर में रहने वाले लोगों के लिए मंडी के रूप में स्थापित किया गया. 1850 आते-आते यहां घास-फूस के अस्थायी झोपड़ों की जगह चिनाई वाले मकान दिखाई देने लगे. आसपास के घने जंगलों को काट दिए जाने से जलवायु में हुए सुधार की वजह से अब आबादी स्थायी तौर पर बसने लगी.

1860 में कमिश्नर रैमजे ने इसे तराई का तहसील मुख्यालय बना दिया. इस तरह हल्द्वानी के एक कस्बे के रूप में विकास करने की शुरुआत हुई. इस तरह उत्तराखण्ड के मैदानी भाग का एक गांव पहले कस्बा और बाद में एक भरा-पूरा साधन संपन्न आधुनिक शहर बन गया.

1884 में बरेली-काठगोदाम रेलवे लाइन के बिछ जाने से इसके व्यावसायिक कस्बे के रूप में विकसित होने की शुरुआत हुई. आज यह भारत के सभी प्रमुख राज्यों और महानगरों से सड़क और रेल मार्ग से पूरी तरह जुड़ा हुआ है.

इमारती लकड़ी हल्दू की बहुतायत होने की वजह से इसे हल्दूवनी कहा गया. हल्दूवनी ही बाद में हल्दूआनी होता हुआ हल्द्वानी में तब्दील हुआ.

चंद शासन और ब्रिटिश भारत के शुरुआती सालों में बाजपुर-अल्मोड़ा मार्ग हल्द्वानी के करीबी गांव बमौरी से बाड़ाखेड़ी (काठगोदाम), भीमताल होते हुए गुजरती थी. 1824 में पादरी हेवर रुद्रपुर से पैदल भीमताल होते हुए अल्मोड़ा गए. अपनी यात्रा के ब्यौरे में हेवर ने हल्द्वानी का कहीं जिक्र नहीं किया है.  

इस फलते-फूलते नगर ने 1885 में टाउन एरिया कमिटी का दर्जा हासिल किया और 1897 में हल्द्वानी नगर पालिका की स्थापना हुई. 1899 में यहां तहसील कार्यालय खोल दिया गया.

सन 1929 की अल्मोड़ा यात्रा के दौरान महात्मा गांधी हल्द्वानी भी आए.

1937 में हल्द्वानी में नागरिक चिकित्सालय खोला गया. 1942 में हल्द्वानी-काठगोदाम नगर पालिका परिषद् का गठन हुआ. उस समय इसे चौथे दर्जे की नगर पालिका का दर्जा दिया गया जिसे दिसम्बर 1966 में प्रथम श्रेणी कर दिया गया.

22 मई 2011 को हल्द्वानी नगर पालिका को नगर निगम बना दिया गया.

आज हल्द्वानी उत्तराखण्ड के प्रमुख व्यावसायिक कस्बों में से एक है. यहां कुमाऊं मंडल के सभी प्रमुख सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल हैं, जहां कुमाऊं ही नहीं राज्य की सीमा से सटे उत्तरप्रदेश के नागरिक भी इलाज के लिए पहुंचते हैं. हल्द्वानी तेजी से विकसित होता हुआ एजुकेशन हब भी है. यहां सभी विषयों के स्कूल, कॉलेज और उच्च शिक्षा संस्थान हैं.  (History of Haldwani City)

सन्दर्भ: हिमालयन गजेटियर (एडविन टी. एटकिंसन), उत्तराखण्ड ज्ञानकोष (प्रो.डी.डी. शर्मा), इंटरनेट.     

“हीराडुंगरी रम्य प्रदेसा” – अल्मोड़ा के इतिहास का एक दिलचस्प पन्ना
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Sudhir Kumar

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