समाज

कसारदेवी में चार चाँद लगाते पैयाँ के फूल

दुनिया की सबसे खुबसूरत जगहों में एक है कसारदेवी. कसारदेवी अपने हर मौसम में अपने अलग रंग में दिखता है. Cherry Blossom in Kasaradevi

इन दिनों अल्मोड़ा के कसारदेवी के जंगलों में चेरी ब्लॉसम की बहार आई है. चेरी ब्लॉसम को हम पहाड़ में पैयाँ कहते हैं. Cherry Blossom in Kasaradevi

पैयाँ के पेड़ों में इन दिनों बहार आयी है, इन पेड़ों में खूबसूरत फूल खिले हुए हैं. जिसने कसार देवी की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं.

देखिये कसारदेवी अल्मोड़ा से कुदरत के इस खूबसूरत करिश्मे को ! सभी चित्र जयमित्र सिंह बिष्ट द्वारा हैं!

फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट

काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online

जयमित्र सिंह बिष्ट
अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

View Comments

  • बहुत खूब लेखन, जानकारियां व मेरे पहाड़ के सामाजिक तानों बानों से संजोने में आप लोगों के प्रयासों को धन्यवाद। पहाडों की खूबसूरती को जन जन तक पहुंचाने के लिए आप की टीम को आभार व भविष्य की सफलता की कामना करते हैं। बहुत खूब दृश्य देखने को मिला। सभी को नमन व आभार। 🙏

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

4 days ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

4 days ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

4 days ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

1 week ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

1 week ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

1 week ago