चादर ट्रेक लद्दाख क्षेत्र : एक फोटो निबंध

चादर ट्रेक लद्दाख क्षेत्र के जमी हुई ज़ंस्कार नदी के ऊपर सर्दियों में की जाने वाली एक दुर्गम ट्रेकिंग है. जंस्कार घाटी कि खड़ी चट्टानों की ऊंचाई 600 मीटर तक है और कुछ स्थानों में इसकी चौड़ाई केवल 5 मीटर है. सर्दियों में जब जंस्कार नदी जम जाती है तब स्थानीय लोग इस नदी का इस्तेमाल व्यापार मार्ग के रूप में करते हैं और ट्रेकिंग के शौकीन इसके ऊपर कठिन ट्रेकिंग करते हैं.

चादर ट्रेक भारत में एक रोमांचक और साहसिक ट्रेक है. स्थानीय भाषा में “चादर” का मतलब परत होता है “नदी के ऊपर बर्फ की परत”. सर्दियों के दौरान जंस्कार नदी बर्फ की चादर में बदल जाती है. जिसके ऊपर चला जा सकता है. लद्दाख की कठोर सर्दियों में यह नदी स्थानीय लोगों के लिए लेह और जांस्कर घाटी को जोड़ने का एकमात्र रास्ता बनती है. कई सालों से चादर ट्रेक दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, यह बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण ट्रैक है जिसमें 105 किमी. की पैदल यात्रा की जाती है.

सर्दियों में यह का तापमान —30 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है जो इस नदी को और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना देता है पर यात्रा के दौरान इस नदी के आसपास बसे लोगों का जीवन भी देखने मिलता है और जंस्कार नदी के भी कई रंग—रूप इस ट्रेक के दौरान देखने को मिलते हैं.

 

 

विनीता यशस्वी

विनीता यशस्वी नैनीताल  में रहती हैं.  यात्रा और  फोटोग्राफी की शौकीन विनीता यशस्वी पिछले एक दशक से नैनीताल समाचार से जुड़ी हैं.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

1 week ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

1 week ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

1 week ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

1 week ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

1 week ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

1 week ago