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जब टार्च जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा थी

आजकल तो भाबर में अब शहर तो छोड़िए गांव-गांव बिजली की चमक पहुँच गयी है. चार दशक पहले ऐसा नहीं…

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निर्मल वर्मा की कहानी ‘परिंदे’

अंधेरे गलियारे में चलते हुए लतिका ठिठक गयी. दीवार का सहारा लेकर उसने लैम्प की बत्ती बढ़ा दी. सीढ़ियों पर…

4 years ago

हरसिल की यात्रा

हरसिल, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित एक खूबसूरत घाटी है, जो कि भागीरथी नदी के किनारे अवस्थित है. इसके…

4 years ago

छिपलाकोट अन्तर्यात्रा: सारा जमाना ले के साथ चले

पिछली कड़ी यहां पढ़ें: छिपलाकोट अन्तर्यात्रा: बेचैन बहारों को गुलजार हम करें पिथौरागढ़ आते ही नैनीताल वाली आम आदत फिर…

4 years ago

नैनीताल में पहला डोसा और छुरी-काँटा

पहाड़ों में 80 के दशक में पले बढ़े युवाओं के लिए भोजन के नाम पर अधिक व्यंजनों की गुंजाइश नहीं…

4 years ago

परमात्मा का कुत्ता: सरकारी दफ्तरों का सच कहती कहानी

बहुत-से लोग यहाँ-वहाँ सिर लटकाए बैठे थे जैसे किसी का मातम करने आए हों. कुछ लोग अपनी पोटलियाँ खोलकर खाना…

4 years ago

रोपाई से जुड़ी परम्पराओं पर एक महत्वपूर्ण लेख

आज भले ही हमारे खेत बंजर हो रहे हैं. हम गुणी-बानरों की बात कहकर खेती छोड़ रहे हों पर एक…

4 years ago

सामाजिक सरोकारों से सरोकार रखने वाले डॉ. दीवान नगरकोटी नहीं रहे

सुबह सबेरे ही आज लखनऊ से मित्र मोहन उपाध्याय ने दिल उदास करने वाली खबर दी कि दीवान नगरकोटी नहीं…

4 years ago

चालाक सियार: पहाड़ी लोककथा

एक बार जंगल में तेंदुए, भेड़िए, बिल्ली, चूहे और सियार ने मिलकर एक बेहद तेज भागने वाले मोटे हिरन को…

4 years ago

स्व. बी डी पाण्डे की आत्मकथा ‘इन द सर्विस ऑफ़ फ्री इंडिया’

पुस्तक के परिचय में रत्ना एम. सुदर्शन लिखती हैं- यह किताब उन लोगों को आश्चर्यचकित करेगी जो मेरे पिता को…

4 years ago