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लोक कथा : मनमंजरी और सियार

किसी जंगल में एक बकरा और बकरी साथ रहा करते थे. बकरी का नाम था मनमंजरी. दोनों बहुत दुखी थे,…

4 years ago

लोक कथा : माँ की ममता

प्यार से गोपू पुकारा जाने वाला गोपाल बहुत मिन्नतों के बाद पैदा हुई अपने माता-पिता की इकलौती संतान था. माता-पिता…

4 years ago

रंग-भरी एकादशी के साथ असल पहाड़ियों की होली शुरू

पहाड़ों में असल होली की शुरुआत एकादशी से ही होती है. दशमी और एकादशी के जोड़ के दिन गांव-गांव में…

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लोककथा : भाई भूखा था, मैं सोती रही

चैत्र का महीना शुरू हो गया था. सभी ब्याहताओं की तरह वह भी अपने भाई का रस्ता देखने लगी. भाई…

4 years ago

कल है फूलदेई

प्रकृति की गोद में पलने और बढ़ने वाले पहाड़ियों का पर्व फूलदेई है कल. पहाड़ियों का जीवन में प्रकृति का…

4 years ago

ढलान : नवीन कुमार नैथानी की कहानी

नदी तक पहुँचने की हड़बड़ाहट में उन्होंने गलत पगडंडी पकड़ ली. यह संकरा रास्ता था और ढलान तेज थी. वे…

4 years ago

लोक कथा : दिन दीदी रुको-रुको, अभी रुक जाओ

जाने कैसा भाग बदा था उस बहू का जो ऐसी दुष्ट सास मिली. बहू जितनी सीधी-सादी, निश्छल व सरल स्वभाव…

4 years ago

लोककथा : इजा! बस तीन पतली-सी रोटियाँ

बहुत पुरानी बात है. उस पहाड़ी गाँव में एक लड़की रहती थी. माँ के अलावा उसका इस दुनिया में कोई…

4 years ago

जाखन : नवीन कुमार नैथानी की कहानी

जाखन नाम की वह नदी सौरी के लोगों को सपनों में बहती हुई दिखाई पड़ती थी. उनके सपनों के बाहर…

4 years ago

जलवायु परिवर्तन की रपट

आईपीसीसी अर्थात "इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज" की चिरप्रतीक्षित रपट के जारी होने से विश्व भर में जलवायु परिवर्तन के…

4 years ago