संस्कृति

काली कुमाऊं के जिमदार देवता अर्थात भूमिया की कथा

भूमि के देवता के रूप में जिमदार, भूमियाँ व क्षेत्रपाल, इन तीन नामों से पूजा जाता है. भूमिया जो भूमि…

7 years ago

ऐतिहासिक महत्व का है कुमाऊं का गणानाथ मंदिर

अल्मोड़ा नगर से 47 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गणानाथ मंदिर जाने के लिए अल्मोड़ा-सोमेश्वर मार्ग पर स्थिर रनमन नामक…

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गणानाथ मन्दिर की अलौकिक विष्णु प्रतिमा

अल्मोड़ा से कोई 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गणानाथ का मंदिर मूलतः शिव का मंदिर है. समुद्रतट से 2116…

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एक त्रिशूल की आंखिन देखी

मैं, अर्थात गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित त्रिशूल, आँखिन देखी अपनी कथा सुनाकर जी हल्का करना चाहता…

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ऐपण कला की उम्मीद पिथौरागढ़ की निशा पुनेठा

उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति के विलुप्त हो जाने की आशंका के बीच कई युवा अपने जिद्दी इरादों के साथ इस कुहासे…

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रामलीला ही नहीं राजनीति के भी दशरथ हैं बंशीधर भगत

उत्तराखंड प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले विधायक बंशीधर भगत जब आते हैं स्टेज पर तो बज उठती…

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कुमाऊनी लोकगीतों के चैम्पियन चम्पावत के बीके सामंत

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो पहाड़ को छोड़कर भी पहाड़ को नहीं भूलते हैं, उन्हीं में से एक है…

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क्या आवश्यक हैं रामलीला में अशोभनीय प्रसंग?

सीता स्वयंवर व धनुष यज्ञ प्रसंग में अनेक रामलीलाओं में फूहड़ता देखने को मिलती है. धनुष तोड़ने आये राजाओं की…

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कौन है पहाड़ों की नन्दा देवी

शिव के साथ-साथ शक्ति की उपासना भी अति प्राचीन काल से होती आई है बल्कि यह कहना अधिक उचित होगा…

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कुमाऊनी रामलीला के तबला उस्ताद: मास्साब मनोहर लाल

पिछले छः दशक से भी अधिक समय से रामलीलाओं में तबला वादक के रूप में भागीदारी कर रहे मनोहर लाल…

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