कॉलम

क्या हम इतने बुरे थे

कल कमाल हो गया. हम लिखते और देखते ही रह गए और हमारा मित्र अमर हो गया. कल आलोचक जी…

6 years ago

दारमा घाटी: स्वर्गारोहण के दौरान जहां पांडवों ने पांच चूल्हे लगाकर अंतिम भोजन बनाया

दारमा घाटी की ख़ूबसूरती की व्याख्या शब्दों में कर पाना बहुत कठिन है. इन तस्वीरों को देखकर आप महसूस कर…

6 years ago

डरे हुये बच्चों की दवा होता था आमा के हाथ का बिंदा

आमा के हाथ का जादू सिर्फ खाने के जायके तक सीमित नहीं था. उसके हाथों ने गॉंव के उन तमाम…

6 years ago

हल्द्वानी वाले बुआ-फूफा जी और उनके स्मार्ट फोन

उनकी गृहस्थी सुन्दर थी. फूफा बुआ को स्कूटर पर घुमाते थे. हर इतवार या छुट्टी के दिन वे दोनों किसी…

6 years ago

पीन सुंदरी: उत्तराखण्ड की नायिका कथा

मेरे एक दोस्त कहते थे महिलाएँ सब एक सी होती हैं. उनका संदर्भ शायद शेक्सपियर के औरत तेरा दूसरा नाम…

6 years ago

दादा दौलतराम : टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व

‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने का अवसर नहीं दिया जिससे हम बायां अंगूठा लगाने को मजबूऱ हैं, लेकिन अब…

6 years ago

ढलती उम्र में बेडौल शरीर की स्त्री को बच्चा ही ख़ास होने का एहसास दिलाता है

4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 60 (Column by Gayatree Arya 60)पिछली किस्त का लिंक: सभी मां-बाप बचपन से बच्चों…

6 years ago

उत्तराखण्ड के लोक संगीत के एक युग थे जीत सिंह नेगी

एक पखवाड़े के भीतर उत्तराखण्ड के लोक संगीत को दूसरा बड़ा झटका रविवार 21 जून 2020 को लगा, जब यहॉ…

6 years ago

गढ़वाली गीत-संगीत-रंगकर्म का आदिपुरुष : जीत सिंह नेगी

साल 2014 में मैं जब जीत सिंह नेगीजी से पहली बार रूबरू मिला था तो सोचा था कि वापसी में…

6 years ago

कुमाऊनी लोककथा- जानवरों और पक्षियों की बोली समझने वाली ब्वारी की हत्या

बड़ी पुरानी कथा है. एक गाँव में एक लड़के को उसके बाप ने बड़े ही लाड़ से पाला. मां के…

6 years ago