फोटो : mountain_foothill इन्स्टाग्राम प्रोफाइल से साभार
अब बड़ी ककड़ी के रायते के तो कहने ही क्या. हरी ककड़ी की चोरी भी माफ़ ठेरी. पर तभी तलक जब तक बुड बाड़ों की नज़र चूकी रहे. नन्तर ककड़ी तो गई सो गई ऐसी ऐसी गालियां खाने को मिलें कि पुस्त दर पुस्त का सराद हो और वो भी ऐसा कि बड़े बड़े मसाण तर जाएं. Benefits of Cucumber Kakdi
ककड़ी को खाने से पहले इसकी मुंडी चाकू से कट्ट काट ककड़ी की कटी मुंडी में आयात-वर्ग सा चाकू खरोंच लूण डाल, काटे गए ऊपरी हिस्से से खूब रगड़ देते तो सफ़ेद झाग निकलता. झाग वाली मुंडी बदमाशी में किसी यार के माथे पे चिपका भी जाती.
हरी छोटी ककड़ी तो देखते ही उदरस्त हो जाती. वैसे रायते के लिए पीली पड़ गई या तप कर भूरी पड़ गई ककड़ी गजब होती. इसे काट कोर कर गूदा हटा मोटे कपडे से निचोड़ सारा पानी निथार लेते. अब ठेकी में जमे दही में कोरा निथरा भाग मिलाते. साथ में काली राई व खुस्याणी पीस कर मिलाते. थोड़ा नमक भी पड़ता. जितना सानो फेंटो उतना स्वाद रायता बनता. बस दही पनियल न हो नहीं तो रायता फैलने व पतपत होने की झसक बनी रहती. Benefits of Cucumber Kakdi
ककड़ी के पानी को आटे में गूँथ चोखी रोटी बनती. पीली भूरी ककड़ी का पानी हल्का दूधिया लसदार होता. ये पेट दर्द में भी काम आता. ककड़ी के अलावा मूली का भी रायता बनता जिसकी तासीर गनेन होती. पके केले में गुड़ या शक्कर मिला मीठा रायता तैयार होता. बेथवे को उबाल कर जो रायता तैयार होता वो पेट की सारी आदि -व्याधि हर लेता. ऐसी ही तासीर लौकी के रायते की भी होती.
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online
जीवन भर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल महाविद्यालयों में अर्थशास्त्र की प्राध्यापकी करते रहे प्रोफेसर मृगेश पाण्डे फिलहाल सेवानिवृत्ति के उपरान्त हल्द्वानी में रहते हैं. अर्थशास्त्र के अतिरिक्त फोटोग्राफी, साहसिक पर्यटन, भाषा-साहित्य, रंगमंच, सिनेमा, इतिहास और लोक पर विषदअधिकार रखने वाले मृगेश पाण्डे काफल ट्री के लिए नियमित लेखन करेंगे.
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई…
जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी से कल शाम मुलाकात हुई. दरअसल,उनके निर्देशन में…
उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा के मुख्य आकर्षण में से एक रामलीला का मंचन इन…
लोग इसे पहाड़ और पलायन की कहानी की तरह देखेंगे. लोग इसे खंडहर होते जा…
पिछली कड़ी : सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन संघर्षनामा का ये किस्सा आजादी…
गाँव में सब उसे जानते थे. कोई उस के पास सब्जी लेने आता तो वह…
View Comments
बचपन की याद ताजा कर दी आपने ।