तब बची गौड़ धर्मशाला ही यात्रियों के लिए इकलौता विश्राम स्थल थी हल्द्वानी में – 1894 में बनी

7 years ago

[एक ज़माने में तराई-भाबर का भी इकलौता बाजार था हल्द्वानी का मंगल पड़ाव] हल्द्वानी में आने-जाने वालों के लिए इकलौता…

क्या उत्तराखण्ड के लोग गौणा ताल के शिलालेख को पढ़ने के लिए तैयार हैं?

7 years ago

उत्तराखंड में हिमालय और उसकी नदियों के तांडव का आकार प्रकार अब हर मौसम में धीरे–धीरे दिखने लगा है. लेकिन…

उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना और यथार्थ के विषय पर हल्द्वानी में आयोजित संगोष्ठी

7 years ago

जब विचारों का ज्वार धधक रहा हो, मन में सवाल उमड़-घुमड़ रहे हों, बेचैन करने वाली तमाम तस्वीर हमारे सामने…

मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, परिस्थितियां उसकी गुलाम हैं

7 years ago

पहाड़ और मेरा जीवन – 52 ( Sundar Chand Thakur Memoir) (पिछली क़िस्त: इस विपुला पृथिवी को मैं जानता ही…

रात के अंधेरे में अपने ही राज्य के छात्रों को पीटती है उत्तराखंड की वीर पुलिस

7 years ago

पुलिसिया आदेश की ये कठोर आवाजें, युवा लड़के-लड़कियों के चीखने और सुबकने की आवाज़ें, अभिभावकों की गुस्से से भरी भावुक…

पहाड़ के बड़े पत्रकार सुरेन्द्र पुंडीर नहीं रहे

7 years ago

वरिष्ठ पत्रकार, कवि-साहित्यकार, सेवानिवृत शिक्षक व उत्तरांचल प्रेस क्लब के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे सुरेंद्र पुंडीर जी का आज…

हिन्दी में लिख रहे नौजवान लेखक ‘गहन है यह अन्धकारा’ से खूब सारे सबक सीख सकते हैं

7 years ago

पुलिस को खबर मिलती है कि एक जली हुई सिर कटी लाश मिली है. पुलिस तफ्तीश करती है और कई…

मासी जैसी छोटी सी पहाड़ी जगह में मैराथन – पहाड़ से एक और अलख

7 years ago

अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया ब्लॉक के तल्ला गेवाड़ में एक छोटी सी बसासत है मासी. रामगंगा नदी के पूर्वी किनारे…

गरमपानी की बाज़ार और उसका ब्रांडेड रायता

7 years ago

राई को लाल खुस्याणी, पहाड़ी हल्द-धनिये के बीजों  के साथ सिलबट्टे में खूब पीस लेते हैं. फिर कोर कर निचोड़ी…

एक ज़माने में तराई-भाबर का भी इकलौता बाजार था हल्द्वानी का मंगल पड़ाव

7 years ago

हल्द्वानी में पहले हल्दू के पेड़ बहुतायत में हुआ करते थे इसलिए उसे हल्द्वानी कहा जाने लगा. वर्तमान हल्द्वानी के…