Default

उत्तराखण्ड की रुचिका लोकप्रिय टीवी शो डांस प्लस में मचाएंगी धमाल

अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया की ग्राम पंचायत धनस्यारी की रहने वाली रुचिका नेगी मात्र 10 बरस की उम्र में भारत के नंबर वन डांस रियलिटी शो ‘डांस प्लस’ के लिए हुआ है. इस शो के लिए चुने गए 9 लोगों में से रुचिका एक है. रुचिका उत्तराखण्ड से चुनी गयी अकेले प्रतिभागी हैं. (Ruchika Negi Dance Plus)

उत्तराखण्ड के एक गुमनाम गांव धनस्यारी से रुपहले पर्दे तक का यह सफ़र रुचिका और उनके परिवार के लिए काफी संघर्षों भरा रहा है. बचपन से ही नृत्य में गहरी दिलचस्पी लेने वाली रुचिका के पिता ने उनकी इस प्रतिभा को पहचाना और बेटे के सपनों के लिए कुछ भी कर गुजरने का फैसला लिया. रुचिका के पिता संजय नेगी ने उत्तराखण्ड के अपने कारोबार को भी बंद कर रुचिका के लिए मुम्बई आने का फैसला लिया. सामान्य मध्यमवर्गीय जीवन बसर कर रहे संजय 2 साल पहले मुम्बई पहुंच गए और मायानगरी में डिलीवरी बॉय की जॉब करने लगे. कुल मिलाकर संजय ने रुचिका के हुनर को देश के सामने लाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया. लेकिन रुचिका ने भी अपने पिता को निराश नहीं होने दिया और देश के सबसे बड़े डांस शो में जगह बनाने में कामयाब रहीं.

परिवार का त्याग और रुचिका के मेहनत ने रंग दिखाया और उनका चयन ‘डांस प्लस’ जैसे घर-घर में मशहूर टीवी शो के लिए हो गया. कड़ी प्रतियोगिता के पांच चरण पार करने के बाद रुचिका का चयन इस प्रतियोगिता के लिए हो गया. अंतिम चरण में रुचिका को ले जाने तक के लिए उनके पिता को एक परिचित से कर्ज लेना पड़ा.

कुल मिलाकर छोटे पर्दे पर उत्तराखण्ड लगातार दस्तक दे रहा है. विभिन्न रियलिटी शोज में उत्तराखण्ड का टैलेंट बीते दिनों दिखाई दिया है. फिलहाल चम्पावत के पवनदीप पूरे देश में छाए हुए हैं और अब रुचिका अपने डांस का जादू बिखेरती नजर आएँगी. (Ruchika Negi Dance Plus)

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

View Comments

  • यकुलान्स का शाब्दिक अर्थ क्या है ।

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

6 days ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

6 days ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

6 days ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

1 week ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

1 week ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

1 week ago