जयमित्र सिंह बिष्ट

अल्मोड़े से ‘सुपर ब्लू मून’ की तस्वीरें

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree

“वन्स इन ए ब्लू मून” खूब कही और सुनी सुनी जाने वाली एक कहावत है. अंग्रेजी भाषा की इस कहावत का सामान्य अर्थ है कुछ ऐसा जो हमेशा नहीं होता. बीते दिन दुनिया ने ब्लू नहीं सुपरब्लूमून देखा. आकाश में घटने वाली यह खगोलीय घटना साल 2009 के बाद बीते दिन ही देखी गयी.
(Super Blue Moon 2023 Uttarakhand)

इस खगोलीय घटना में पूर्णिमा के दिन चांद पृथ्वी के सबसे करीब था इसलिए इसे सुपरमून कहा गया और क्योंकि यह एक महीने में दूसरी पूर्णिमा थी इसलिये इसे ब्लू मून कहा गया. अब दोनों खगोलीय घटनायें एक ही साथ ही घटी तो बन गया सुपर ब्लू मून.

चांद के पृथ्वी के नजदीक होने के कारण सुपरमून ज्यादा चमकीला और बड़ा दिखाई देता है. सुपरमून की घटना साल में 3 से 4 बार हो सकती है. ब्लू मून लगभग हर दूसरे-तीसरे बरस घटने वाली एक खगोलीय घटना है.        

अल्मोड़ा के सामने पूरब में बानड़ी देवी के पास की पहाड़ी से उदय होते चंद्रमा का विहंगम दृश्य देखिये. सभी तस्वीरें काफल ट्री के अनन्य साथी जयमित्र सिंह बिष्ट ने खींची हैं.
(Super Blue Moon 2023 Uttarakhand)

जयमित्र सिंह बिष्ट

अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.

इसे भी पढ़ें: हर दिन हरेला जीने वाली पहाड़ की महिलाएं

काफल ट्री का फेसबुक पेज : Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

3 weeks ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

3 weeks ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

3 weeks ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

4 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

4 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

4 weeks ago