जयमित्र सिंह बिष्ट

सोमेश्वर से धान की रोपाई की जीवंत तस्वीरें

पहाड़ में रोपाई उत्सव, हुड़किया बौल – जुलाई 2022, सोमेश्वर, अल्मोड़ा, उत्तराखंड.

बरसात के मौसम के साथ ही शुरू हो गया है उत्तराखंड के पहाड़ों और खेतों में रोपाई का उत्सव, लोकपर्व. हुड़किया बौल में हुड़किया खेतों में काम कर रही महिलाओं के लिए हरु हीत, राजुला मालूशाही और अन्य लोकगाथाएं और लोकगीत गाता है. महिलाएं भी साथ में इन पारंपरिक गीतों और गाथाओं को गाती है और साथ ही साथ खेतों में रोपाई भी करती हैं. इस दौरान खेतों का वातावरण ऐसा लगता है मानो कोई उत्सव हो रहा हो. बच्चे इस दौरान खेतों में खेलते नज़र आते हैं. पुरुषों के जिम्मे रोपाई से पहले बैल चला कर खेतों को रोपाई लायक बनाने का काम होता है. किशोर नौजवान खेतों की मेड़ों को ठीक करते नज़र आते हैं और रोपाई के लिए सबसे जरूरी पानी को व्यवस्थित तरीके से खेतों तक पहुंचाते हैं. (Someshwar Ropai Hudkiya Baul)

कई सीढ़ीनुमा खेतों में एक साथ रोपाई चल रही होती है. सभी लोग और महिलायें इस रोपाई के उत्सव को बड़े चाव से जीते हैं. खेतों और अपनी माटी के प्रति इन सब का प्रेम देखने लायक है. एक दिन में सुबह से शाम तक चलने वाले इस हुड़किया बौल, रोपाई उत्सव को देखने और महसूस करने का अलग ही आंनद है.

हमारे उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की सुंदरतम घाटियों में से एक सोमेश्वर घाटी में आजकल चल रही रोपाई और हुड़किया बौल का आनंद लीजिए और महसूस कीजिए इन फोटोग्राफ्स के माध्यम से.

जयमित्र सिंह बिष्ट

अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.

इसे भी पढ़ें: बधाणगढ़ी से हिमालय के दृश्य

काफल ट्री का फेसबुक पेज : Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

View Comments

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

3 weeks ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

3 weeks ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

3 weeks ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

3 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

4 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

4 weeks ago