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जस्टिस रंजन गोगोई अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया

सुप्रीम कोर्ट में दूसरे सबसे वरिष्‍ठ जज जस्टिस रंजन गोगोई, 3 अक्‍टूबर को भारत के अगले मुख्‍य न्‍यायाधीश का पदभार ग्रहण कर सकते हैं. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने जस्टिस रंजन गोगोई के नाम की सिफारिश अगले चीफ जस्टिस के लिए की है. कानून मंत्रालय ने सीजेआई दीपक मिश्रा से अगले चीफ जस्टिस के नाम की सिफारिश भेजने को कहा था. जस्टिस मिश्रा ने शनिवार को जस्टिस रंजन गोगोई का नाम सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश के लिए कानून मंत्रालय को भेजा है. जस्टिस मिश्रा की तरफ से सिफारिश जाने के बाद जस्टिस रंजन गोगोई देश का अगला प्रधान न्यायाधीश बनना तय हो गया है. सूत्रों के अनुसार जस्टिस गोगोई अगले साल 17 नवंबर तक मुख्‍य न्‍यायाधीश रहेंगे.

गौरतलब है कि जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल हैं जिन्होंने पहली बार मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाए थे. सवाल उठाने वाले सुप्रीम कोर्ट के चार जजों में जस्टिस रंजन गोगोई के साथ जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे. चारों जजों ने न सिर्फ अनियमितता को लेकर लिखी चिट्ठी को सार्वजनिक कर दिया बल्कि चीफ जस्टिस पर नियमों की अनदेखी कर केस जजों या फिर खंडपीठ को सौंपने का आरोप लगाया. जिसमें कई केस काफी अहम हैं. चारों जजों ने कहा कि अगर न्याय व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो लोकतंत्र महफूज नहीं रहेगा. चारों जजों ने कहा कि उन्होंने अपनी बातें चीफ जस्टिस के सामने रखी. उन्हें चिट्ठी भी लिखी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया. इसके बाद उनके पास देश के सामने अपनी बात रखने के अलावा कोई चारा नहीं था.

1954 में जन्मे गोगोई वर्ष 1978 में बार काउंसिल में शामिल हुए थे. इसके बाद, 28 फरवरी, 2001 को उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया. फरवरी, 2011 में वह पंजाब व हरियाणा के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए. उन्हें पदोन्नति देकर अप्रैल, 2012 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया. जस्टिस गोगोई असम के रहने वाले हैं और वह उस विशेष खंडपीठ का नेतृत्व कर रहे हैं जो पूर्वोत्तर के राज्यों में नागरिकों की पहचान करने के लिए नेशनल रेजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) को अपडेट करने के मामले को देख रहे हैं.

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