विनोद कापड़ी द्वारा निर्मित चर्चित फ़िल्म पायर “चिता” पूरे देश में रिलीज गई है. 26 साल पहले जब उत्तराखंड राज्य बना था तब शायद विनोद कापड़ी और राज्य के लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें उस उत्तराखंड राज्य पर ऐसी फ़िल्म बनानी पड़ेगी जिसमें पहाड़ के आमा बूबू ख़ुद अपनी चिता लगाते नज़र आयेंगे पर ये आज का एक कटु सत्य ही है, कि आज उत्तराखंड के कई भूत गाँवों के हालात ऐसे हो गए हैं जहाँ या तो गाँव के गाँव पलायन कर गए हैं या फिर सिर्फ़ वो बुजुर्ग बच गए हैं जिन्होंने अपने उन बच्चों को पालने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया जो शायद अब कभी वापस उस गाँव और पहाड़ में न आयें.
पहाड़ में रहना उन लोगों के लिए एक रूप से जीते जी मरने जैसा ही होता जा रहा है जो वर्तमान में उन गांवों में रह रहे हैं. खैर ये एक बहुत गंभीर विषय है और शायद इस फ़िल्म के बाद हम लोग जागें और चर्चा करें कि कैसे हम उत्तराखंड को नया जीवन दे सकें.
विनोद कापड़ी ने इस फ़िल्म के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है 2018 में इस फ़िल्म की कल्पना के बाद 2022 में उत्तराखंड के बेरीनाग जैसी सुदूर कस्बे के भी गाड़, गधेरों और जंगलों में एक महीने से भी ज़्यादा पायर (चिता) फ़िल्म के पूरे क्रू के साथ रहना और शूटिंग करना शायद विनोद कापड़ी ही कर सकते थे और लगभग 8 साल का लंबा धैर्य इस फ़िल्म की शूटिंग के विचार, शूटिंग और रिलीज़ तक. क्योंकि इस फ़िल्म की शुरुआत से ख़ासतौर पर शूटिंग लोकेशन के चयन के लिए विनोद कापड़ी जी से लगातार बात होती रही इसलिए उससे जुड़ा एक क़िस्सा आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूँ.
मेरे मन में इस फ़िल्म के दारमा घाटी की पंचाचुली चोटियों के फ्रेम के साथ एक सीन का आईडिया था ये बात मैंने विनोद जी को बताई वो इसके लिए तैयार भी हो गए इसके बावजूद की वो बरसात के दिन थे और कई कोशिशों के बाद भी हम वो सीन शूट नहीं कर पाए पर विनोद दारमा तक अपने पूरे क्रू के साथ उस सीन को शूट करने के बहुत उत्साहित थे लेकिन भयानक बारिश और बकरियों (इनकी कहानी फिर कभी) के कारण उन्हें वो शूट रद्द करना पड़ा नहीं तो शायद क्लाइमेक्स के कुछ सीन में हमें पंचाचूली नज़र आती. फिर भी हमारी उम्मीदों से कहीं ज़्यादा इस फ़िल्म के डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी मानस भट्टाचार्य ने बेरीनाग की वादियों में उस लैंडस्केप और लाइट को अपने कैमरे में कैद किया जिसकी आज पूरी दुनिया मुरीद हो चुकी है. इसी का परिणाम है कि पायर अब तक 18 इंटरनेशनल अवॉर्ड्स जीत चुकी है और आगे भी शायद और कितने और अवॉर्ड्स जीते पर मेरी नज़र में इस फ़िल्म ने जो सबसे बड़ा अवार्ड जीता है वो ये है कि जो आँसू इस फ़िल्म को देखने बाद बच्चों, युवाओं और लोगों ने अपनी आँखों से निकाले हैं, उससे बड़ा अवार्ड शायद ही कुछ और विनोद कापड़ी और उनकी पूरी फ़िल्म टीम के लिए हो सकता है. ये ऑस्कर से भी बड़कर है जो प्यार लोगों का पायर को मिल रहा है.
पायर फिल्म अपनी रिलीज़ होने की तारीख से पिछली शाम तक ही एडवांस बुकिंग का एक रिकॉर्ड बना चुकी थी. लगभग 20 लाख से ज़्यादा लोग इस फ़िल्म का पहले दिन का शो एडवांस में बुक कर चुके थे. आप भी Book My Show ऐप से अपने नज़दीकी सिनेमाहाल और मल्टी प्लेक्स में अपना टिकट बुक कर फिल्म देख सकते हैं. फिलहाल आप लोगों के लिए इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान 16 सितंबर 2022 में ली कुछ एक्सक्लूसिव तस्वीरें शेयर कर रहा हूँ. ये सभी फोटो पायर की शूटिंग के लगभग आख़िरी दिनों में बेरीनाग के पास गराउँ गाँव से पैदल जंगल के बीचों बीच स्थित छिण (झरने) के पास से ली गई हैं. फोटो व विवरण- जयमित्र सिंह बिष्ट, हिमालयन जेफर, अल्मोड़ा, उत्तराखंड
अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.
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