हैडलाइन्स

उत्तराखंड की राजनीति में वंशवाद हावी

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यहां कि राजनीति की सबसे ख़ास बात यह रही कि यहां अधिकांश विधायक का जीवन संघर्षों से भरा रहता. क्या यूकेडी, क्या भाजपा, क्या कांग्रेस. विधानसभा में जाने वाले अधिकांश विधायक बेहद सामान्य परिवारों से होते. इस बात का एक उदाहरण ख़ुद वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हैं.
(Nepotism in Uttarakhand Politics)

उत्सेतराखंड में राजनीति के क्षेत्र में ऐसे नामों की एक पूरी श्रृंखला है जो बहुत छोटे से गावों से निकलकर देश के अति-महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. भले ही कोई इन नामों की विचारधारा से कोई सहमत न हो लेकिन कोई भी व्यक्ति उनके संघर्षों को कम नहीं आंक सकता. कुल मिलाकर उत्तराखंड की राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद जैसा कभी नहीं था. यहां जिसमें प्रतिभा हुई वही आगे बढ़ा.

राज्य बनने के दो दशकों बाद राज्य की राजनीति वंशवाद और परिवारवाद के कोड़ से ग्रसित हो चुकी है. वर्तमान में उत्तराखंड की राजनीति में प्रतिभा पर वंश और परिवार हावी हो चुका है. वर्तमान में वंशवाद इस कदर हावी है कि पिता पुत्र की जोड़ी विधानसभा सदस्य बनती हैं. फ़िलहाल जिस ट्रेंड पर उत्तराखंड की राजनीति चल रही है उसमें कहा जा सकता है कि जो वंशवाद पिछले विधानसभा चुनाव में आंशिक रूप से दिखता था वह अब ख़ुल्मखुल्ला चलेगा.  
(Nepotism in Uttarakhand Politics)

अगले साल 2022 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की अभी तारीख घोषित नहीं हुई है लेकिन नेताओं ने अपने-अपने बेटों और बेटियों को चुनाव की तैयारी में जुटा दिया है. बड़े-बड़े आयोजन कर नेता अपने बच्चों को राजनीति में उतार रहे हैं. वंशवाद के इस खेल में कोई एक पार्टी शामिल नहीं है बल्कि सभी पार्टियों का ‘हमाम में सब नंगे’ वाला हिसाब है.

राज्य की राजनीति में अब पार्टी कार्यकर्ता के लिये इतना स्पेस भी नहीं बचा है कि वह अपनी पार्टी के भीतर विधानसभा टिकट पर दावा कर सके. जिस ओर उत्तराखंड की राजनीति चल रही है उसमें पार्टी का कार्यकर्त्ता अधिक से अधिक सरकारी ठेकेदारी प्राप्त करने के सपने देख सकता है. लोकतंत्र के लिये वंशवाद कितना घातक है उसे भारतीयों से बेहतर कौन समझ सकता है.
(Nepotism in Uttarakhand Politics)

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

काफल ट्री डेस्क

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

गौरा को किसी से शिकायत नहीं थी

गाँव में सब उसे जानते थे. कोई उस के पास सब्जी लेने आता तो वह…

2 hours ago

देवदार या देव दारु

देवदार या देव दारुः देवों के वृक्ष मुख्य रूप से हिमालय मे लगभग डेढ़ हज़ार…

4 days ago

कसारदेवी : जहां स्वर्ग के सबसे करीब होने का अहसास होता है

“कसारदेवी या अल्मोड़ा जैसी छोटी सी जगह में ऐसा क्या है जो दुनियाभर से लोगों…

4 days ago

दुर्गम पहाड़ों तक कैसे पहुंचे महाराष्ट्र-गुजरात के पर्व

बचपन में हमें होली-दिवाली और राखी के अलावा मकर संक्रांति, घी त्यार और फूलदेई जैसे उत्सवों…

2 weeks ago

पिथौरागढ़ में स्विट्ज़रलैंड बनने की है पूरी क्षमता

इस बार करीब 9 साल बाद पिथौरागढ़ जाकर एक बात साफ दिखी कि यहां कुछ…

2 weeks ago

अलमोड़े में नंदादेवी मेले की ताज़ा तस्वीरें

आस्था और विश्वास की प्रतीक श्री नंदा देवी की भक्ति में इन दिनों पूरा उत्तराखंड…

3 weeks ago