समाज

कुमाऊँ में अलग विशेषताओं वाली जमीन के नाम

उत्तराखण्ड में अलग-अलग विशेषताओं वाली जमीन के लिए अलग शब्द या वाक्यांश इस्तेमाल किये जाते हैं. (Names of Land with Different Characteristics in Kumaon)

‘तलांव’ यानि निचाई वाली ऐसी जमीन जहां सिंचाई की सुविधा हुआ करती है को; सेरा, सीरा, कुलो या पाणी खेत कहा जाता है. ‘उपरांव’ यानि ऊंचाई वाली वह जमीन जहां सिंचाई की सुविधा नहीं हुआ करती को; सिम कहा जाता है. दलदली भूमि, जिसे कृत्रिम सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, को गांजो या सेमार कहा जाता है. अच्छी समतल जमीन को चौड़, तप्पड़ कहा जाता है. खेती के अयोग्य जमीन को टीत, उखड़ कहलाती है.

कई अलग नामों वाले खेतों के समूह को सार. तोक या तानो कहा जाता है. बाड़ो (बगीचा), गुरो, खेत, कनुलो, पूचुरो, हंगो आदि खेतों की स्थिति के अनुसार उनके नाम हुआ करते हैं. गैर यानि घाटी किनारे के खेत, कुमुनो यानि कृषिरत जमीन, बांजो माने बंजर, परती जमीन. ढलाऊ जगहों के खेत रेलो कहे जाते हैं. जिन खेतों में मालिक द्वारा स्वयं खेती की जाती है उन्हें सीर कहा जाता है. धूप वाली जमीन तैलो तो छाया वाली जमीन सीलो कहलाती है.

इसे भी पढ़ें : कुमाऊँ के पारंपरिक घरों की संरचना

दो खेतों के बीच की दीवार पगार, बिर या भिड़ा कही जाती है. जिस जंगली जमीन पर अस्थायी खेती की जाती है उसे झझर, मान या खिल कहते हैं.

मल्ला यानि ऊपर तो तल्ला मतलब नीचे वाला.  उकाल मतलब चढ़ाई, वलार माने उतार. घट यानि पनचक्की तो ओखरियाल मतलब जिस ओखल में धान कूटा जाता है. भेड़ के बाड़े को खोड़ कहा जाता है तो पशुओं के अस्थायी बाड़े को गोठ, खरक या ग्वाड़ कहते हैं.     

(हिमालयन गजेटियर : एडविन टी. एटकिंसन के आधार पर)

इसे भी पढ़ें : बिना दूल्हे वाली बारात की भी परम्परा थी हमारे पहाड़ों में

इसे भी पढ़ें : उत्तराखण्ड में वर्तमान शिक्षा प्रणाली का पहला स्कूल 1840 में श्रीनगर में खुला

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

      

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

View Comments

  • जानकारी बहुत अच्छीहै, पर एक भी शब्द सही नहीं है...
    "धूप वाली जमीन तैलो तो छाया वाली जमीन सीलो कहलाती है..."
    जैसे इसमें तैलो लिखा है , ये तैल होता है....

Recent Posts

पहाड़ो में भूस्खलन

उत्तराखण्ड का अधिकांश भूभाग हिमालय की पर्वतीय श्रृंखलाओं में स्थित है, जहाँ तीव्र ढाल, गहरी नदी घाटियाँ, युवा…

2 days ago

जर्मन की लड़ाई और रुद्रनाथ की चढाई

पनार बुग्याल के ऊपरी छोर वाले रास्ते पर अब हम चल रहे हैं. पनार चोटी…

2 days ago

हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी

पिछली कड़ी : कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल सन 1928 में अल्मोड़ा…

2 days ago

हैप्पी बर्थडे कॉर्बेट साहब

जिम कॉर्बेट उन चुनिंदा विदेशी मूल के भारतीयों में से एक हैं जिन्होंने भारत में…

4 days ago

28 साल के युवा से जब टिहरी रियासत डर गई

रात का वक्त था. जुलाई की बारिश पहाड़ों को भिगो रही थी, और भिलंगना नदी हमेशा…

4 days ago

दुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास

मानव इतिहास में सत्ता के विरुद्ध विरोध उतना ही पुराना है जितना संगठित शासन. प्रारंभिक…

5 days ago