Featured

गुलदाढू से सावधान भोंकता कम काटता ज्यादा है

गैरीगुरु की पालिटिकल इकानोमी : अथ चुनाव प्रसंग- 2 पिछली क़िस्त यहां पढ़े-गैरीगुरु की पालिटिकल इकानोमी : अथ चुनाव प्रसंग…

7 years ago

घर पर ऐसे बनता था उत्तराखंड में पिठ्या

उत्तराखंड में सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत पिठ्या लगाकर ही होती है. पिठ्या को यहां अत्यंत शुभ माना जाता है.…

7 years ago

उत्तराखंडी चेतना की नई शुरुआत या पटाक्षेप

फरवरी 2014 में, जब उस वक़्त के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के त्यागपत्र के बाद हरीश रावत को मुख्यमंत्री की कमान…

7 years ago

छूट प्रथा : उत्तराखंड के जौनपुर की प्रथा

उत्तराखंड में टिहरी गढ़वाल में एक खुबसूरत पहाड़ी क्षेत्र है जौनपुर. यमुना के बांयी तरफ स्थित जौनपुर का यह क्षेत्र…

7 years ago

मेरी माँ अब नहीं हैं लेकिन वह नदी अब भी है

आज से नब्बे साल पहले यानी 3 अप्रैल 1929 को शिमला (हिमाचल प्रदेश) में जन्मे निर्मल वर्मा अपने विशिष्ट गद्य…

7 years ago

वनवासियों की व्यथा- समाधान की चिंता

वनवासियों की व्यथा का यह अंतिम हिस्सा है. इस हिस्से में फरवरी माह से हुये नवीनतम घटनाक्रम वर्णित है. इस…

7 years ago

नैनीताल लोकसभा सीट: जहाँ से गोविन्द बल्लभ पंत के बेटे-बहू भी रहे सांसद

पहाड़, भाबर व तराई वाले तीन तरह की भूमि के मिश्रणों वाली नैनीताल लोकसभा सीट अपने पहले लोकसभा चुनाव के…

7 years ago

4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम

आज से काफल ट्री के पाठकों के लिए गायत्री आर्य का कॉलम शुरू किया जा रहा है. ये कॉलम एक…

7 years ago

दिल्ली फिर एक बार

कहो देबी, कथा कहो – 39 पिछली कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 38 तो, परिवार को साल भर के…

7 years ago

जब लता मंगेशकर को 500 रुपये मिलते थे, के. आसिफ ने उन्हें एक गाने के 25000 रुपये दिए थे

पटियाला घराने के खलीफा गायक उस्ताद बड़े गुलाम अली खान साहब का जन्म आज ही दिन यानी 2 अप्रैल 1902…

7 years ago