समाज

कुमाऊँ की सत्ता का ऐतिहासिक केंद्र रहा है पाली-पछाऊं

पाली-पछाऊं द्वाराहाट से 12 मील की दूरी पर है. इसे चन्द राजाओं की राजधानी के रूप में जाना जाता है. यहाँ गोरखागढ़ी नामक जगह पर गोरखा राज्य के अवशेष आज भी खण्डहर के रूप में मौजूद हैं. ईसा से लगभग 2500 वर्ष पूर्व कत्यूरी शासन काल से लेकर 14 अगस्त, 1947 तक यह कुमांऊँ क्षेत्र के परगना नामक क्षेत्र का राजधानी की तरह सत्ता का केन्द्र रहा है. इसी पाली पछाऊं नामक केन्द्र से कुमाऊँ क्षेत्र के हजारों गाँवों का राजकाज संचालित किया जाता था. यहाँ बोली जाने वाली विशिष्ट कुमाऊनी को पाली-पछाऊं की कुमाऊनी या पछाईं कहा जाता है.

इसे सरकारी पाली भी कहा जाता है क्योंकि पहले यहाँ पाली तहसील थी, जो बाद में रानीखेत स्थानांतरित कर दी गयी. आज भी रानीखेत तहसील को पाली रानीखेत कहा जाता है. इस समय यहाँ स्थानीय आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्कूल-कॉलेज, अस्पताल और छोटा बाजार भी है. इसके पास ही एक ऊँची पहाड़ी पर नैथाना देवी का मंदिर भी है. नैथाना देवी के मंदिर में हर साल अगस्त के महीने में घी-संक्रांत का मेला लगा करता है. गोरखा राज्य का किला यहाँ आज भी खँडहर के रूप में विद्यमान है.

पाली के पास ही रामगंगा के तट पर मासी और चौखुटिया बसे हुए हैं. चौखुटिया के पास ही अगनेरी देवी का प्रसिद्ध मंदिर भी है. बैशाख के महीने में पाली में स्याल्दे का मेला और मासी में सोमनाथ का मेला लगता है. दोनों ही मेले सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक हैं. मासी में सोमनाथ का प्रसिद्ध व्यापार मेला बैशाख के अंतिम सोमवार को लगा करता है.

कहा जाता है कि कुमाऊँ की लोकप्रिय ऐतिहासिक प्रेमकथा राजुला-मालुसाही का सम्बन्ध भी इसी क्षेत्र से है. आज भी विराट नगरी का बदला हुआ रूप यहाँ ‘वैराठ’ नाम से विद्यमान है. यहीं पर रामपादुका और श्रीनागेश्वर के मंदिर भी हैं.

पाली-पछाऊं में ही रामगंगा के तट पर वृद्धकेदार नाम की प्रसिद्ध जगह है. यहाँ कार्तिक पूर्णमासी को को विशाल मेला लगता है. इस मेले में किये जाने वाले गंगास्नान को पवित्र माना जाता है.

रामगंगा और गगास के तट पर भिकियासैण नामक स्थान भी इसी क्षेत्र पर है. यह प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर स्थान है. इसी के आसपास स्याल्दे, देघाट आदि स्थान अपनी निर्मल जलवायु के लिए पहचाने जाते हैं.

सल्ट क्षेत्र में मानिला देवी का प्राचीन ऐतिहासिक महत्त्व का मंदिर भी है. यह जगह भी कुमाऊँ के रमणीक पर्यटन स्थलों में मानी जाती है. यहाँ से हिमालय की कई चोटियों के नयनाभिराम दृश्य दिखाई देते हैं. मानिला आस-पास के गांवों की शिक्षा का केंद्र भी बना हुआ है.

सन्दर्भ: विकिपीडिया, उत्तराखण्ड ज्ञानकोष (प्रो.डी.डी. शर्मा)

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Sudhir Kumar

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