संस्कृति

पहाड़ में होने वाले शुभ कार्यों में महिलाओं की भूमिका

बचपन से ही अक्सर हम देखते थे गाँव में कोई भी शुभ कार्य हो महिलाओं की एक विशेष ही भूमिका…

5 years ago

उत्तराखंड के लिए कई मायनों में खास है लोकपर्व बसंत पंचमी

उत्तराखंडी समाज में बसंत पंचमी का महत्व उसी तरह है जिस तरह मकरैणी यानी मकर संक्रांति का. पंचमी पर स्नान…

5 years ago

भावुक कर देने वाला विदाई गीत है ‘बाट लागी बरयात चेली’

‘बाबुल की दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले’ गीत को उत्तर भारत की शादियों का राष्ट्रीय विदाई गीत…

5 years ago

‘मुनस्यारी हाउस’ इस तरह पहाड़ी उत्पादों का सबसे विश्वसनीय ब्रांड बना

उत्तराखण्ड की सीमान्त जोहार घाटी में मिलम के करीबी गांव जलथ में रहने वाले प्रयाग रावत बचपन से ही हिमालय…

5 years ago

उत्तराखण्ड के लोक संगीत की धरोहर हैं संत राम-आनंदी देवी

संत राम और आनंदी देवी की जोड़ी में उत्तराखण्ड का लोक संगीत बसता है कहना बिलकुल गलत नहीं होगा. इस…

5 years ago

किर्जी भाम : 12 सालों में मनाया जाने वाला महोत्सव

उत्सव शब्द ही अपने आप में हर्षो-उल्लास एवं खुशी को व्यक्त करता है. जब भी किसी उत्सव की बात होती…

5 years ago

‘कुमाऊँ का होली गायन : लोक एवं शास्त्र’ के लेखक डॉ पंकज उप्रेती से बातचीत

देवभूमि उत्तराखंड के हर क्षेत्र में डेढ़ सौ साल से भी अधिक समय से शास्त्रीय संगीत पर आधारित बैठकी होली…

5 years ago

नए साल के लिए उत्तराखण्ड का अपना कैलेंडर

भांति-भांति के कैलेंडर देखकर एक उत्तराखंडी होने की वजह से हमारा भी मन करता है कि हमारा भी अपना एक…

5 years ago

लोककथा : धौन पानी का भूत

धौन पानी क्षेत्र के एक गांव में तीन लोग रहते थे — सास, ससुर और बहू. सास और ससुर बहु…

5 years ago

उत्तराखंड की लोककथा : फूलों की घाटी

हिमालय पर्वत की घाटी में एक ऋषि रहते थे. बर्फ सी सफेद पकी दाढ़ी वाले ऋषि कंद, मूल, फल खाते…

5 years ago