भांति-भांति के कैलेंडर देखकर एक उत्तराखंडी होने की वजह से हमारा भी मन करता है कि हमारा भी अपना एक कैलेंडर हो. उत्तराखण्ड की लोक, कला, संस्कृति से सजा-संवरा यह कैलेंडर हम सभी की चाहत का हिस्सा है. हमारी इस इच्छा को पूरा करता है प्रज्ञा आर्ट्स का यह कैलेंडर. प्रज्ञा हर साल उत्तराखण्ड की संस्कृति केंद्रित कर एक कैलेंडर प्रकाशित करता है. साल-2021 के कैलेंडर की थीम थी शौर्य गाथा उत्तराखण्ड की मिट्टी की. साल-2022 के प्रज्ञा आर्ट्स के कैलेंडर में उत्तराखण्ड की प्रेम कथाओं को दर्शाया गया है. (Prem Gatha Calendar Pragya Arts)
अपनी मिट्टी की खुशबू और गौरव से भरे इस कैलेंडर को प्रज्ञा आर्ट्स और ग्रुप की निदेशक लक्ष्मी रावत के फेसबुक पेज या मोबाइल नंबर +91-8826123032 पर संपर्क कर प्राप्त किया जा सकता है.
12 पन्नों के इस कैलेंडर में उत्तराखण्ड की बारह प्रेमगाथाओं के मनमोहक चित्रों के साथ इन प्रेम कथाओं का संक्षिप्त वर्णन भी किया गया है. यह कैलेंडर आकर्षक होने के साथ ही उत्तराखण्ड की प्रेम कथाओं के लिए जिज्ञासा पैदा करने वाला भी है.
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प्रेमकथा, उत्तराखंड की मिट्टी की नाम से प्रकाशित इस कैलेंडर में उत्तराखंड की संक्षिप्त प्रेम गाथाओं साथ उत्तराखण्ड के प्रमुख त्यौहारों और मेलों के बारे में भी जानकारी दी गई है.
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड की लक्ष्मी रावत प्रज्ञा आर्ट्स की निदेशक होने के साथ ही देश-दुनिया के प्रतिष्ठित थियेटर ग्रुप ‘श्रीराम सेंटर फॉर परफार्मिंग आर्ट’ की वर्कशाप डायरेक्टर भी हैं. ढेरों नाटकों, फिल्मों और शॉर्ट मूवीज में अभिनय और निर्देशन कर चुकीं लक्ष्मी रावत जाने-माने ब्रांड के विज्ञापन में भी दिखाई देती हैं. इसके अलावा लक्ष्मी की फ़िल्म ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म अमेजन प्राइम में आने वाली हैं.
‘प्रज्ञा आर्ट्स’ इस समय देश के स्थापित थियेटर ग्रुपों में से एक है. प्रज्ञा आर्ट्स के बैनर तले लक्ष्मी ने कई नाटकों का निर्देशन किया और कई में अभिनय भी किया, इनमें तीलू रौतेली, तृष्णा, जीतू बगड़वाल, चल अब लौट चलें, कै जावा भेंट आखिर, शांति विहार गली नंबर 6, क्योंकि मैं औरत हूं, पर्दा उठाओ पर्दा गिराओ आदि प्रमुख हैं. गौरतलब है उनके अधिकतर नाटकों का परिवेश उत्तराखंडी है. उत्तराखण्ड की वीरांगना तीलू रौतेली पर मंचित नाटक को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री समेत कई दिग्गज नेताओं और नौकरशाहों की भी सराहना मिली. लक्ष्मी रावत द्वारा निर्देशित और उन्हीं की मुख्य भूमिका वाला प्रज्ञा आर्ट्स का नाटक ’क्योंकि मैं औरत हूं’ भारत ही नहीं अन्य देशों में भी मंचित हुआ. इस चर्चित नाटक की पृष्ठभूमि दिल दहला देने वाले निर्भया काण्ड के इर्द-गिर्द रची गयी थी. लक्ष्मी द्वारा निर्देशित लोकप्रिय नाटक ‘चल अब लौट चलें’ भी प्रवासी उत्तराखंडियों के दुखों और अंतर्द्वंदों को बहुत बेहतर तरीके से रचता है.
प्रज्ञा आर्ट्स प्रोडक्शन’ लम्बे समय से शार्ट मूवीज बना रहा है जिन्हें आप उनके यू ट्यूब चैनल में देख सकते हैं. अब जल्द ही यह बैनर उत्तराखण्ड की पृष्ठभूमि पर एक फीचर फिल्म लेकर आ रहा है.
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