फोटो : सुधीर कुमार
बचपन से ही अक्सर हम देखते थे गाँव में कोई भी शुभ कार्य हो महिलाओं की एक विशेष ही भूमिका होती थी. किसी के भी घर का कोई भी मांगलिक काम हो महिलाओं द्वारा उस घर में एकत्रित हो कर गीत गाए जाते थे, शगुन गाये जाते थे. (Role of Women in Auspicious Works in the Mountain)
हर मांगलिक काम का एक अलग ही गीत होता था. यदि किसी का बच्चा होता तो उस समय जच्चा-बच्चा को ले कर गीत गाये जाते, जिस में बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की जाती. बच्चे की माँ को विशेष तौर पर इस प्रकार से गा कर बधाई दी जाती— “सुहागिली जच्चा बढ़ भागिली जच्चा तुम्हें तुम्हारा बच्चा मुबारक हो, मुबारक हो!” जब माँ द्वारा बच्चे को बार-बार देखा जाता तो उसे चिढ़ाने हेतु महिलाओं द्वारा गाया जाता कि “जच्चा झुकी-झुकी पलना देखे कि लाल मेरा किसपे गया, कि गोरा-गोरा किसपे गया मेरा ललना.”
यदि किसी घर में बच्चे का जन्मदिन होता तो उस समय “तुम्हें और क्या दूँ दुआ के सिवाय, लल्ला तुमको हमारी उमर लग जाये.” इस प्रकार से गीत गाए जाते.
जनेऊ संस्कार के समय अलग ही प्रकार से शगुन गाए जाते हैं और बट्टू के नाम के मंगल गीत गाये जाते हैं.
शादी होने पर तो गणेश पूजा से ले कर विवाह सम्पन्न होने तक महिलाओं द्वारा गाये जाने वाले मंगलगीतों कि एक अलग ही भूमिका होती है. शुरुआत में शगुन गा कर फिर बाकी गीतों को गाया जाता है. महिलाएं वधू पक्ष से हो या वर पक्ष से हर कोई अपनी अपनी तरफ से मंगलगीत गाते हैं.
पक्की सड़क से जुड़ चुका गांव अब गांव सा नहीं रहा
जब बारात तैयार होने को होती है तो महिलाओं द्वारा गाया जाता है, “दूर घुमन मत जाओ प्यारे बन्ना, आज तुम्हारी शादी का दिन है.” बारात जब लड़की के घर पहुँचती है तो वधूपक्ष द्वारा वर पक्ष के स्वागत में विभिन्न प्रकार के गीत गाये जाते हैं. स्वागत गीत के पश्चात हंसी मजाक वाले भाव से गीत इस प्रकार से गाये जाते हैं— “आये बाराती आये, आये हैं बड़ी शान से.” या फिर “मुर्गा बोला कुकड़ी कूं, इतने बाराती लाये क्यों.” इस प्रकार माहौल एकदम ख़ुशनुमा हो जाता है. उसके बाद जब दुल्हन आँगन में आ जाती है तो इस तरह से गीत गाया जाता है — “दूर बन्ना गाये बन्नी को बुलाये आजा प्यारी बन्नी रे अटरिया सुनी रे.” जब वरपक्ष की तरफ से दुल्हन को सुहाग का सामान दिया जाता है तो महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला गीत होता है— “सुहाग अम्बे गौरी बन्नी को दीजो सोहाग, जैसो सोहाग तुमने सरस्वती को दीना सरस्वती ने ब्रह्मा वर पाय. पाय अम्बे गौरी बन्नी को दीजो सोहाग.” इसी प्रकार से अन्य देवी-देवताओं के नाम के साथ गीत को समाप्त किया जाता है.
जब माता-पिता द्वारा लड़की का कन्यादान किया जाता है और वर द्वारा वधू का अंगूठा पकड़ा जाता है तो मंगलगीत गाने वाली महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला गीत होता है— “पकड़ कर हाथ का अंगूठा गृहस्थी अब चलानी है, निभाया आज तक बचपन गृहस्थी अब निभानी है.” जिस से माहौल एकदम से हँसी मज़ाक से ठहराव में आ जाता है. इसके उपरांत फेरे की विधि के समय भी कुछ मंगल गीत गाये जाते हैं.
हर शुभकार्य में महिलाओं द्वारा गाये जाने वाले शगुन और मंगलगीत खुशियों में और भी चार चाँद लगा देते हैं. ️
पिथौरागढ़ में रहने वाली भूमिका पाण्डेय समाजशास्त्र और मनोविज्ञान की छात्रा हैं. लेखन में गहरी दिलचस्पी रखने वाली भूमिका पिथौरागढ़ डिग्री कॉलेज की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं.
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online
इसे भी पढ़ें: बदलते ज़माने में पहाड़ की महिलाओं के हालात कितने बदले
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
Олимп казино официальный сайт в Казахстане - Olimp Casino ▶️ ИГРАТЬ Содержимое Преимущества игры в…
Qu’est‑ce que le 1xbet APK ?Télécharger et installer le 1xbet APK en toute sécuritéCréation de…
Betify Casino en Ligne | Jouez sur Betify avec 1000 € ▶️ JOUER Содержимое Betify…
Polskie kasyna online z darmowymi spinami dla nowych graczy ▶️ GRAĆ Содержимое Jak wybrać najlepsze…
Slovenské online kasína - zoznam odporúčaných kasín pre hráčov ▶️ HRAť Содержимое Odporúčané online kasína…
Zonder Cruks Online Casino - Veiligheid en beveiliging van spelers ▶️ SPELEN Содержимое Veiligheid van…