कथा

उत्तराखण्ड की लोककथा : गाय, बछड़ा और बाघ

एक गांव में गाय अपने बछड़े के साथ रहती थी. बछड़े को घर छोड़ गाय रोज हरी घास चरने जंगल…

4 years ago

लोककथा : मुर्दे के साथ ब्याह

नियति जैसे अभागी रुकमा से रूठी थी. रुकमा के नामकरण के बाद ही उसके पिता चल बसे. लेकिन इजा ने…

4 years ago

लोककथा : कर्ज

दूर देश से यह तीर्थ यात्री केदारनाथ धाम की यात्रा पर पहुंचा. बाबा केदार के दर्शन कर वह वापस लौट…

5 years ago

झूसिया दमाई : कालीतट की भारतीय और नेपाली साझी संस्कृति की मौखिक परम्परा की जीवंत कड़ी

बस्कोट (नेपाल) में जन्मे झूसिया दमाई (जन्म: 1910, मृत्युः 16 नवम्बर 2005) जितने नेपाल के थे उतने ही भारत के…

5 years ago

लोककथा : ह्यूंद की खातिर

पुरानी बात है जब दो वक्त की रोटी जुटाना ही बड़ी बात थी. उन्नत बीज और सही जानकारी न होने…

5 years ago

लोककथा : दुबली का भूत

सम्पूर्ण हिमालयी क्षेत्रों में स्थायी निवास के साथ-साथ प्रायः एक अस्थाई निवास बनाने का चलन है, जिसे छानी या खेड़ा…

5 years ago

काली कुमाऊं के जिमदार देवता अर्थात भूमिया की कथा

भूमि के देवता के रूप में जिमदार, भूमियाँ व क्षेत्रपाल, इन तीन नामों से पूजा जाता है. भूमिया जो भूमि…

6 years ago

रामलीला ही नहीं राजनीति के भी दशरथ हैं बंशीधर भगत

उत्तराखंड प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले विधायक बंशीधर भगत जब आते हैं स्टेज पर तो बज उठती…

6 years ago

गढ़वाल के राजा मान शाह और सुरजू डंगवाल की लोककथा

एक समय की बात है, बहादुर शाह नाम का व्यक्ति गढ़वाल में राज करता था. उसके राज्य की राजधानी श्रीनगर…

7 years ago

रोपणी के खेत से जीतू को हर ले गयी आंछरियां

इन दिनों पहाड़ के गांवों के खेतों में रोपाई अर्थात रोपणी की जा रही है. अषाढ़ के महीने की छः…

7 years ago