कॉलम

हमारे बचपन में अभावों का भी बढ़ा भाव था

नोस्टालजिया का झरोखा तो सुकून देता ही है जनाब! चाहे वह कितना ही अभावों भरा क्यों न हो. लेकिन सच…

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द्रोणागिरि के लोग आज भी क्यों भगवान हनुमान से नाराज हैं : तीस साल पुरानी रिपोर्ट

प्रकाश पुरोहित जयदीप द्वारा लिखा गया ये आलेख बहुत लोकप्रिय है. नब्बे के दशक में लिखे गये इस आलेख के…

6 years ago

चैतोल पर्व : लोकदेवता देवलसमेत द्वारा सोरघाटी के बाईस गांवों की यात्रा का वर्णन

मध्यकाल में लगभग शत-प्रतिशत पहाड़ कृषि खेतीबाड़ी पर ही जीवनयापन करता था. जीवन प्रकृति के समीप था, आचार व्यवहार हर…

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अन्वालों के डेरे और ब्रह्मकमल का बगीचा

अंग्रेज भले हमें सालों गुलाम बना कर गए हों उनके प्रति हमारा आकर्षण कभी कम नहीं हुआ. जैसे ही हमें…

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नटखट चैतू के चैतू झांजी बनने की कहानी

आज फिर जशोदा काकी चैक से बाहर नहीं दिखी, रास्ते से आते जाते लोगों ने आज फिर काकी को एकतर्फा…

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आज चार्ली चैपलिन की जयन्ती है

आज यह हिसाब लगाना मुश्किल है कि चार्ली चैपलिन किस कदर लोकप्रिय थे. दुनिया के सबसे बड़े कलाकार, चित्रकार, कवि,…

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विश्व विख्यात श्रीनंदादेवी राजजात मार्ग पर पहला अध्ययन

उत्तराखण्ड में 220 किमी लम्बी धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहसिक पदयात्रा का नाम है नंदा देवी राजजात. इसे उत्तराखण्ड के…

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जनसरोकारों की पत्रकारिता के एक स्तम्भ थे पुरुषोत्तम असनोड़ा : श्रद्धांजलि

वरिष्ठ पत्रकार व उत्तराखण्ड के विभिन्न जनान्दोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले पुरुषोत्तम असनोड़ा का 15 अप्रैल की शाम ऋषिकेश…

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सिनला की चढ़ाई और सात थाली भात

पंद्रह अगस्त का दिन, बचपन से ही हमारे लिए उल्लास और उत्साह का दिन. लेकिन इस बार की पंद्रह अगस्त…

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लेखकों को पाठक बनकर समझ आ रहा है कि उन्होंने जनता का कितना उत्पीड़न किया है

कोरोना के इस लॉक-डाउन से एक बात बाखूबी समझ आ रही है कि चुनाव सम्बंधी एक्ज़िट पोल क्यों फ़ेल हो…

6 years ago