कॉलम

चैत्र के महीने में उत्तराखंड के तीज-त्यौहार और परम्परा

सब ओर प्रकृति में हरियाली सज जाती है. नई कोंपलों में फूल खिलने लगते हैं. चैत मास लग चुका है.…

6 years ago

बच्चे का पेट से निकल कर गोद तक पहुंचना मां के लिए कितना जानलेवा है

4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 49 (Column by Gayatree arya 49) पिछली किस्त का लिंक:  लेबर पेन के…

6 years ago

छुअ जिन मोरे लाल

सीन वन: सलामी आज से तकरीबन पच्चीस बरस पहले का होगा ये वाक़िया. गर्मियों के दिन थे और अपने बड़े…

6 years ago

चंद्र दत्त पंत मास्साब की स्मृति में

मैं उनसे पहली बार आज से ठीक 58 वर्ष पूर्व मार्च 1962 में मिला था. मैंने वहां लीलावती पंत इंटर…

6 years ago

पांच बीघा लम्बे नाम का झंझट

जिन्होंने ‘लोकतांत्रिक’ विश्वविद्यालयों या महाविद्यालयों में रत्ती भर भी पढ़ाई की है, वे छात्र राजनीति में ‘नाम’ के महत्व से…

6 years ago

अद्भुत है मां पूर्णागिरी धाम की यह कथा

11 मार्च बुधवार को विधि विधान के साथ टनकपुर में ठुलीगाढ़ प्रवेश द्वार में स्थित माँ पूर्णागिरि धाम के कपाट…

6 years ago

अब होली जैसी होली नहीं बची पहाड़ों में

होली आने वाली है ये सोचकर ही इस साल मन में काफी उत्साह था क्योंकि बचपन की होली की तस्वीर…

6 years ago

शिक्षा जगत का बैल और खेतों का विद्यार्थी उर्फ़ भैया जी

हम सब उम्र के उस दौर में थे जिसे वय:संधि कहते हैं और जिसके वर्णन के बहाने पुराने कवियों ने…

6 years ago

ओएशडी सैप कह लो चाहे निजी शचिव कह लो – नीश हर जगह होने वाले हुए उत्राखंड में

उसने अपनी फुलौड़ी नाक को ज़रा सा टेढ़ीयाया और बोला- 'वरफ़ारी हो रई वरफ़ारी' (Personal Secretaries of Modern Politicians Satire)…

6 years ago

फूल बन कर खिलने वाली पर्वतपुत्री है फ्यूंली

गढ़वाल में चैत के महीने में गाए जाने वाले लोकगीत चैती कहलाते हैं. अधिकतर लोकगीतों का वर्ण्य विषय लोकगाथाएँ होती…

6 years ago