कॉलम

अपने संघर्षों पर हमेशा मुस्कुराने वाले पहाड़ियों के सपनों पर चांदनी एंटरप्राइजेज का गीत: आस

सपनों से दिखने वाले हिमालय के बीच बसे गावों में हर समय सपने पलते हैं. सपनों में कोई फौजी है…

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आधी आबादी का बराबरी के लिये संघर्ष

यूं तो वर्ष 8 मार्च 1908 में न्यूयॉर्क शहर में 15 हजार महिला मजदूरों ने अपने काम के घंटे तय…

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समाज में पर्यावरण के प्रति महिलाओं का दृष्टिकोण

भारतीय समाज के निर्माण में महिलाओं की महत्ती भूमिका रही है. यहां की महिलाओं ने घर, परिवार, समाज एवं राजकीय…

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गोविन्द वल्लभ पन्त की कहानी ‘फटा पत्र’

प्रजापति और मास्टरों के घंटों में इतनी शरारत नहीं करता था, जितनी पंडित श्रानंदरन साहित्य-शास्त्रीजी के घंटे में. वे जब…

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जिंदगी बनेगी बेहतर, चौकन्नी नजर तो पैदा कर

जीवन रस्सी पर चलने वाले नट जैसा संतुलन मांगता है. हर नए क्षण में संतुलन. क्योंकि इस क्षण अगर इस…

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उदय शंकर संगीत एवं नृत्य अकादमी के मंच पर ‘पहाड़ के रंग’ की अद्भुत तस्वीरें

उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा, पहाड़ की संस्कृति को संरक्षित रखने में हमेशा अग्रणी रही है. इस क्रम में पिछले…

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पहाड़ की होली और होल्यारों की रंग भरी यादें

पहाड़ की होली और होल्यारों की यादो का रंगीन पिटारा जहां भी खुले शमा रंगमस्त हो जाता है. कभी वक्त…

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जब उत्तराखंड के जंगलों में भटके दयानन्द सरस्वती

स्वामी दयानन्द जी 11 अप्रैल सन् 1855 को 30 वर्ष की उम्र में कुम्भ मेले की धूम सुनकर उत्तराखण्ड के…

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पहाड़ के गांवों में नाचने वाली ‘रफल्ला’ के जीवन की कहानी

फागुन के आखिरी दिनों में रफल्ला, गाँव के नजदीक के गधेरे में अपना घाघरा धो रही है. बसंत इन दिनों…

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कठिन पद यात्रायें प्रकृति के करीब ले जाती हैं

ऊपर ज्योरागली में धूप निखर आई थी. कुछेक साथी वहां पहुंच भी गए थे तो ठंड में जमी रूपकुंड झील…

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