गरमपानी की बाज़ार और उसका ब्रांडेड रायता

7 years ago

राई को लाल खुस्याणी, पहाड़ी हल्द-धनिये के बीजों  के साथ सिलबट्टे में खूब पीस लेते हैं. फिर कोर कर निचोड़ी…

एक ज़माने में तराई-भाबर का भी इकलौता बाजार था हल्द्वानी का मंगल पड़ाव

7 years ago

हल्द्वानी में पहले हल्दू के पेड़ बहुतायत में हुआ करते थे इसलिए उसे हल्द्वानी कहा जाने लगा. वर्तमान हल्द्वानी के…

टिहरी-उत्तरकाशी में बारह साल बाद नील कुरेंजी की बहार आई है बल

7 years ago

दूर उत्तराखंड के पहाड़ों से रैबार देने वाले पत्रकार साथी संजय चौहान और शैलेंद्र गोदियाल का कहना है कि उत्तरकाशी…

ऐसे बना था नीमकरौली महाराज का कैंची धाम मंदिर

7 years ago

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के सन्त बाबा नीम करौली अथवा नीब करौरी के चमत्कारों के संबंध में प्रचुर साहित्य उपलब्ध है न…

भट के डुबके हों या गडेरी की सब्जी गंदरायणी के बिना सारे अधूरे

7 years ago

मेरे दादा के समय तक के किस्से मैंने बचपन में खूब सुने. जितने भी किस्से सुने उनमें एक किस्सा होता…

मिस उत्तराखंड के ख़िताब के बाद दर्जनों फ़िल्में करने वाली लावण्या त्रिपाठी

7 years ago

साल 2006 में मिस उत्तराखंड का खिताब देहरादून की लावण्या त्रिपाठी ने जीता था. दक्षिण भारत के मशहूर फिल्म निर्माता…

ठेठ स्थानीय शब्द कुमाऊनी की रीढ़ हैं – कुमाऊनी भाषा की विशेषताएं

7 years ago

कुमाऊनी में सभी दीर्घ स्वरों के हृस्व रूप भी मिलते हैं. कहीं-कहीं यह हृस्वात्म्कता अर्थ्भेदक भी है. जैसे - (Main…

आठ लोगों की बलि और ले ली केदारनाथ आल वेदर रोड ने

7 years ago

सर पर कफ़न बाँध कर यात्रा करें, उत्तराखंड में हर जगह ऑल वेदर रोडें बन रही हैं. (Eight Deaths on…

त्यौहार का दिन और जंगल की आग – विद्यासागर नौटियाल का एक संस्मरण

7 years ago

उन दिनों मेरे पिता टिहरी -गढ़वाल रियासत की राजधानी नरेन्द्रनगर के पास फकोट नामक स्थान पर तैनात थे. वहां एक…

भीमसिंह, नरसिंह और हरसिंह की कथा

7 years ago

1875 ईस्वी में एक रूसी भारतविद इवान पाव्लोविच मिनायेव अल्मोड़ा आया जहाँ वह तीन महीने रहा. इन तीन महीनों में…