1950 के दशक में एक खुदेड़ दिल्ली बंबई रहने वाले उत्तराखंड के प्रवासियों के बीच खूब लोकप्रिय हुआ, उसके बोल…
किसी का भी आत्महत्या करना हमें बहुत दुखी कर जाता है, क्योंकि हम जानते हैं कि किसी ने कैसी भी…
जी हाँ, पहाड़ के जंगल में ही उगता है काफल. जिसका रसासस्वादन अपने किया और पसंद तो किया ही. फिर…
बरसात के मौसम के शुरू होते ही पहाड़ी प्रदेशों में बादल फटने की घटनाओं की खबर समाचार पत्रों, रेडियो, दूरदर्शन…
सूर्य ऊर्जा और प्रकाश का एक विशालकाय स्रोत है और धरती पर हमारे अस्तित्व को सहजे हुए हैं. खगोलीय घटनाएं…
कोरोना काल के इसी सन्नाटे में उस दिन दो फाख्ते भी मिलने चले आए. जब भी फाख्तो को देखता हूं,…
आमा के हिस्से का पुरुषार्थ -2 कुमाऊनी में एक मुहावरा बड़ा ही प्रचलित है ‘बुढ़ मर भाग सर’ यानि कि…
जून का पहला हफ्ता कुछ गर्म थपेड़ों वाला लेकिन मानसून की आश में झूमता हुआ मानसून पूर्व बारिशों में भीग…
रानीखेत रोड से होती हुई रेवती लकड़ियों की गढ़ोई (बंडल) लेकर जैसे तंबाकू वाली गली से गुजरी, जमनसिंह की आँखों…
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 59 (Column by Gayatree Arya 59)पिछली किस्त का लिंक: एक बच्चा अपनी मां…