बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में 'धुआँ' भर गया. चौधरी की मौत…
माँ की मौत के दो दिन गुज़रे थे. उसकी याद में मुझे बार-बार रोना आ रहा था. पिता जी दिन-रात…
पहाड़ों में लच्छू कोठारी की बेवकूफ संतानों के किस्से खूब कहे जाते हैं. उनकी बेवकूफी के किस्से इस कदर लोकप्रिय…
आज बात करते हैं भात के साथ का दमदार साथी टपकिया की. टपकिया शब्द टपुक से बना है टपुक दरअसल…
सोमेश्वर, कोसी और साईं नदी के बेसिन पर बसा एक उपजाऊ इलाका है. मुख्य फसल धान वाली सोमेश्वर घाटी को…
पहाड़ों में उसके सीमांत से जान -पहचान बढ़ाने के लिए की जाने वाली पद यात्राएं बहुत कुछ दे जातीं हैं.…
शांतिप्रिय तिब्बतियों के मुल्क पर चीन के क्रूर कब्ज़े को चालीस साल बीत चुके थे. एक समय पूर्वी दर्शन के…
श्रीमती ज्वेल जब यहाँ आकर बसीं तो लगा कि मैं, एकबारगी और एकतरफा, उनसे फँस गया हूँ और उन्हें छोड़…
आज सवेरे ही से गुलाबदेई काम में लगी हुई है. उसने अपने मिट्टी के घर के आँगन को गोबर से…
दो अक्टूबर का दिन उत्तराखंड राज्य आन्दोलन के दौरान घटा सबसे क्रूर दिन था. अपने नेताओं के घड़ियाली आंसू देखते…