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समृद्धि और सीमा के रक्षक देवता हरू-सैम के जन्म की कथा

औन हरू हरपट, जौन हरू खड़पट

कुमाऊं में प्रचलित इस लोकोक्ति का अर्थ है हरू, आये हरियाली लाये, हरू जाये सब कुछ नष्ट हो जाये.

हरू के साथ हमेशा सैम देवता के भी मंदिर होते हैं. हरू और सैम दोनों भाई हैं. हरू और सैम के जीवन की गाथा ही हरू-सैम की जागरों में गायी जाती हैं.

बहुत साल पहले निकन्दर नाम का एक राजा हुआ करता था. राजा निकन्दर की बेटी का नाम था कालानीरा. एक वर्ष जब हरिद्वार में कुंभ लगा तो कालानीरा ने अपने पिता से कुंभ में जाने की अनुमति मांगी. पिता ने लंबी यात्रा में अकेली पुत्री को भेजने से मना किया लेकिन बाद में कालानीरा की जिद्द के आगे पिता ने हार कर उसे अनुमति दे दी.

निकन्दर ने अपनी पुत्री को अनुमति एक शर्त पर दी कि वह गंगा में डुबकी नहीं लगायेगी बल्कि घुटनों तक के पानी तक ही गंगा में जायेगी. कालानीरा ने पिता की बात को मान लिया और हरिद्वार के कुंभ में चली गयी.

हरिद्वार के कुंभ में लाखों साधु-संन्यासी गंगा स्नान के लिए आये थे. कालानीरा ने एक कुटिया गंगा के तट बनायी और अगली सुबह गंगा स्न्नान के लिये गयी. पिता की आज्ञा अनुसार उसने घुटनों तक ही गंगा में अपने पैरों को डाला. इतने सारे साधु-संन्यासियों को गंगा में डुबकी लगाता देख कालानीरा का मन भी गंगा में पूरी डुबकी लगाने का हुआ.

कालानीरा ने पिता की बात न मानते हुये गंगा में डुबकी लगा दी ज्यूं ही कालानीरा ने गंगा में डुबकी लगाई सूर्य की पहली किरणें भी गंगा नदी पर पड़ गयी. जैसे ही कालानीरा डुबकी लगाकर गंगा से बाहर निकली तो उसे आभास हुआ कि वह गर्भवती हो चुकी है. लोक-लज्जा के डर से कालानीरा बहुत भयभीत हो गयी और घर न लौटकर जंगलों की और चली गयी.

जंगल में उसे गुरु गोरखनाथ तप करते हुये दिखे. गोरखनाथ जिस स्थान पर तप कर रहे थे वहां की धूनी बुझ चुकी थी पेड़-पौधे फूल सब कुछ सूख चुके थे. कालानीरा ने वहीं रहकर लकड़ियाँ एकत्र की और धूनी जला दी. जल से सींच-सींच कर फुलवारी को हरा-भरा कर दिया. जब गुरु गोरखनाथ की ने आंखें खोली तो वे अत्यंत प्रसन्न हुये और कालानीरा को वरदान मांगने को कहा. कालानीरा ने गुरुगोरखनाथ से मृत्यु का वर मांगा.

कालानीरा के इस अजीब बार जो सुनकर गुरु गोरखनाथ ने उसका दुःख सुना और उसे वरदान दिया कि तुम्हारे सभी पुत्र पराक्रमी होंगे और देवताओं की तरह पूजे जायेंगे.

कुछ दिनों बाद कालानीरा की बाईं कोहनी से एक पुत्र का जन्म हुआ जिसे गुरु गोरखनाथ ने हरू नाम दिया. कालानीरा अब गुरु गोरखनाथ के आश्रम में ही रहने लगी.

एक दिन कालानीरा स्नान के लिए नदी किनारे गयी और अपने पुत्र हरू को गुरु के आश्रम में रख दिया. हरू अपनी माता की रक्षा के लिए माता के पीछे-पीछे चला गया. नदी किनारे कालानीरा पर लटुवा मसान ने हमला कर दिया. मां पर लटुवा मसान का हमला देख हरू लटवा मसान की गर्दन पर चढ़ गया और उसे मार दिया.

दूसरी तरफ आश्रम में हरू को न देख गुरु गोरखनाथ को लगा कि शायद बालक को किसी जंगली जानवर ने खा लिया है तब गुरु ने अपने तप से घास में प्राण फूंक कर एक बच्चे को जन्म दिया. जब कालानीरा अपने पुत्र हरू के साथ आश्रम में आई तो दो-दो बालकों को देखकर चकित रह गयी .

गुरु गोरखनाथ ने कालानीरा को आशीर्वाद दिया कि इनमें जो जन्म का ज्येष्ठ है वह हरु और जो कर्म का ज्येष्ठ होगा वह सैम कहलायेगा और इस तरह सीमा के रक्षक और समृद्धि के देवता हरू सैम का जन्म हुआ.

संदर्भ ग्रन्थ : हरू-सैम की जागर, कृष्णा नन्द जोशी की किताब कुमाऊं का लोक साहित्य, डॉ. त्रिलोचन पांडे की किताब कुमाउनी भाषा और उसका साहित्य.

-काफल ट्री डेस्क

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Girish Lohani

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