फोटो http://newscubes.in से साभार
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बैंच ने गुरुवार को समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है. इसके अनुसार आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा. इस मसले पर सुनवाई की सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, एएम खानविल्कर, डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ ने की.
आईपीसी की धारा 377 को संवैधानिक बैंच ने मूल अधिकारों के तहत अनुच्छेद 14 का हनन माना है.
1994 में पहली बार धारा 377 को पहली बार चुनौती दी गयी थी. 24 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनेकों अपीलों के बाद अपना निर्णय दिया. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा कहा की जो भी जैसा है उसे उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिये.
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