फुटबॉल के लिए उस तरह का क्रेज़ न रखने वाले हमारे अपने देश के अखबारों तक ने उस साल अपने मुखपन्नों पर रोजर मिला की तस्वीरें छापीं थीं. नौ नंबर की गाढ़े हरे रंग की जर्सी पहनने वाले रोजर मिला ने उन दिनों हम क्रिकेट के मारों को जिस तरह उत्तेजना से भरा था याददाश्त में दूसरी मिसाल नहीं मिलती. किसी और फुटबॉल टीम के मैचों का ऐसा इंतज़ार कभी किया हो ऐसा भी याद नहीं पड़ता.
कैमरून के युवा मिडफील्डर अल्फोन्स योम्बी को उनकी अम्मा स्कूल के जूतों के तस्मे बाँधना सिखा रही होंगी जब रोजर मिला (असल नाम अलबर्ट रोजर मूह मिलर) ने वर्ल्ड कप क्वालीफायर के लिए सन 1973 में ज़ाईरे के खिलाफ अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय गोल किया था. अल्फोन्स योम्बी 21 साल की आयु में 1990 के इटली वर्ल्ड कप में खेले थे. 1990 का यह वर्ल्ड कप सबसे ज़्यादा अगर याद किया जाता है तो योम्बी की टीम में फॉरवर्ड खेल रहे रोजर मिला के कारण जिन्होंने अकेले दम पर अपनी टीम को उस साल क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा दिया था. उल्लेखनीय है कि अल्फोन्स योम्बी को 1994 में अमेरिका में खेले गए विश्वकप के लिए अपनी टीम में जगह नहीं मिली. अलबत्ता रोजर मिला ने वह टूर्नामेंट भी खेला.
मई 1952 में एक रेलवे कर्मचारी के घर जन्मे रोजर मिला ने 1982 में स्पेन में हुए वर्ल्ड कप में पहली बार अपने देश का प्रतिनिधित्व किया था. यह कैमरून का पहला वर्ल्ड कप था. पेरू के खिलाफ उनके एक गोल को डिसक्वालीफाई कर दिया गया था. कैमरून ने पहले राउंड में तीन ड्रा खेले और टूर्नामेंट से बाहर हो गई. इसके बावजूद कैमरून ने इटली के साथ ड्रा खेलकर सारी दुनिया को हक्काबक्का कर दिया था. रोजर मिला 1984 के लॉस एंजेल्स ओलिम्पिक्स में भी अपने देश की टीम में थे. 1986 के वर्ल्ड कप के लिए उनकी टीम क्वालीफाई नहीं कर सकी.
1989 में रोजर मिला ने पेशेवर फुटबॉल से संन्यास ले लिया और वे आईलैंड ऑफ़ रीयूनियन में रह कर एक क्लब के लिए शौकिया खेलने लगे. कैमरूनवासी मानते थे कि रोजर मिला का करियर उन ऊंचाइयों तक नहीं पहुँच सका जिसके वे हक़दार थे. दीगर है कि 1976 में उन्हें अफ्रीकन फुटबॉलर ऑफ़ द इयर का अवार्ड भी मिला था.
जब कैमरून ने 1990 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया उसके रूसी कोच वैलेरी नेपोम्नियाची थे जो टीम ने अनुभव और युवा शक्ति के संयोजन के हामी थे. रिटायर हो चुके रोजर मिला उनकी किसी भी योजना का हिस्सा नहीं थे. ऐसे में सारा परिदृश्य एक टेलीफोन कॉल के कारण बिलकुल उलटपुलट हो गया जब कैमरून के तत्कालीन राष्ट्रपति पॉल बीया ने रोजर मिला को स्वयं फ़ोन कर उनसे अपने देश के लिए दुबारा जूते बाँधने का अनुरोध किया. राष्ट्रपति के इस निर्णय के बारे में चुटकी लेते हुए कुछ महीनों बाद रोजर मिला ने कहा – “मेरे ख़याल से बीया एक खराब कोच नहीं थे!”
रोजर मिला को टीम में लिए जाने का फैसला कई मायनों में विवादास्पद माना गया लेकिन टूर्नामेंट के समाप्त होने के बाद वे दुनिया भर में एक सुपरस्टार के तौर पर स्थापित हो गए थे.
पहले राउंड में रूमानिया के खिलाफ उन्होंने दो गोल किये. इसके पहले उनकी टीम मारादोना की कप्तानी में खेल रही अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर बहुत बड़ा अपसेट कर चुकी थी. राउंड ऑफ़ सिक्सटीन में उनके मुकाबला कोलंबिया से था. शुरू के नब्बे मिनट बराबरी पर छूटे पर एक्स्ट्रा टाइम के 16 मिनट बीत जाने तक कोलंबिया 1-0 से आगे हो चुकी थी और अपनी साख के अनुरूप जीतती नज़र आ रही था. अगले तीन मिनटों में रोजर मिला ने दो गोल ठोक कर टीम को क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया.
क्वार्टर फाइनल में गैरी लिनेकर और पॉल गैस्कोइन जैसे सितारों से जड़ी इंग्लैण्ड की टीम थी. इंग्लैण्ड ने पहला गोल किया लेकिन जब पॉल गैस्कोइन ने पेनल्टी एरिया में रोजर मिला को धक्का दिया तो कैमरून को पेनल्टी मिली और स्कोर 1-1 हो गया. तीन मिनट बाद रोजर मिला के एक बेहतरीन पास पर इकेके ने शानदार गोल कर अपनी टीम को 2-1 से आगे कर दिया. कैमरून इतिहास बनाने की राह में था जब तिरासिवें मिनट में गैरी लिनेकर को टंगड़ी मारी गयी और इंग्लैण्ड को पेनल्टी मिली. लिनेकर ने स्कोर बराबर किया और एक्स्ट्रा टाइम तिरासिवें मिनट की कहानी फिर से दोहराई गयी. गैरी लिनेकर को फिर से टंगड़ी मारी गयी और इंग्लैण्ड को फिर से पेनल्टी मिली और कैमरून अंततः इंग्लैण्ड से 2-3 से हार गयी – किसी भी अफ्रीकी टीम का वर्ल्ड कप में तब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने के साथ.
अमूमन सबस्टीट्यूट के तौर पर मैदान में उतरने वाले रोजर मिला गोल करने के बाद भागते हुए कॉर्नर फ्लैग के पास जाते और अपने कूल्हे मटकाते हुए अपने देश का पारमपरिक माकोसा नृत्य करते हुए मस्ती के साथ गोल का उत्सव मनाते. उनका यह सिग्नेचर नाच भी दुनिया भर में मशहूर हुआ जिसकी नक़ल आजकल के तमाम खिलाड़ी किया करते हैं और जिसे दुनिया भर के खेलों में हिस्सा ले रहे अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों की नैसर्गिक नृत्य प्रतिभा के साथ जोड़कर देखा जाता है. यह रोजर मिला के कारनामे का असर था कि 1990 के वर्ल्ड कप की समाप्ति पर फीफा ने फैसला किया कि अगले वर्ल्ड कप से अफ्रीका से दो के बजाय तीन टीमें ली जाएँगी.
1990 के साल वे वर्ल्ड कप में गोल करने वाले सबसे उम्रदराज़ खिलाड़ी बने. यह रेकॉर्ड टूटना था क्योंकि रोजर मिला ने अगले वर्ल्ड कप में भी रूस के खिलाफ एक गोल किया. वे 42 साल के हो चुके थे.
हैरानी नहीं होनी चाहिए कि 2004 में पेले ने सर्वकालीन महानतम खिलाड़ियों की अपनी सूची में रोजर मिला को जगह दी. इसके अलावा कन्फेडरेशन ऑफ़ अफ्रीकन फुटबॉल ने उन्हें पिछले पचास सालों का सर्वश्रेष्ठ अफ्रीकी फुटबॉलर घोषित किया.
एक बेहद उदारमना और मनुष्यता से भरपूर इंसान के तौर पर मशहूर रोजर मिला अफ्रीका से सम्बंधित समस्याओं के उन्मूलन के लिए चलाये जा रहे अनेक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं और दुनिया घूमते हैं. कुछ साल पहले एक पत्रकार ने उनसे पूछा – “क्या आपको याद है आपने कुल कितने मैच खेले और कितने गोल किये?” उसे जवाब मिला – “मुझे नहीं पता. ऐसी बेजान बातों में मेरी कभी दिलचस्पी नहीं रही. मेरे लिए जो भी था फुटबॉल था और उसी का मतलब होता है. बस!”
(फ़ोटो www.jakiri.media से साभार)
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