कॉग्रेस व उत्तराखण्ड की राजनीति को आज रविवार (13 जून 2021) को एक बड़ा झटका लगा है. नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा ह्रदयेश का 80 साल की उम्र में दिल्ली में ह्रदयाघात से सवेरे लगभग 10.30 बजे निधन हो गया. वह कल 12 जून को कॉग्रेस की महत्वपूर्ण में शामिल होने के लिए पहुँची थी. उनके साथ उनके पुत्र व कॉग्रेस कमेटी के सदस्य सुमित ह्रदयेश भी थे. उनके पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए हल्द्वानी लाया जा रहा है. जहॉ कल ( सोमवार – 14 जून को ) उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
(Remembering Indira Hridayesh)
अपने संसदीय अनुभव से सत्ता पक्ष को हमेशा चुनौती देने वाली आवाज अब कभी भी विधानसभा में नहीं सुनाई देगी. कॉग्रेस ने एक कद्दावर महिला नेतृत्व खो दिया है. उत्तराखण्ड की राजनीति के वर्तमान दौर में वह एक अकेली महिला नेता थी, जिन्होंने अपनी राजनैतिक जमीन के दम पर अपना एक मुकाम बनाया था. उन्हें अपने लिए किसी के राजनैतिक संरक्षण की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि वह कॉग्रेस की राजनीति में आज ऐसी स्थिति में थी कि पार्टी के कई बड़े नेताओं को उनके राजनैतिक संरक्षण की आवश्यकता थी. उनके असमय चले जाने से कॉग्रेस की राजनीति में जो खालीपन आया है, उसे भर पाना निकट भविष्य में तो असम्भव है.
उनके निधन का समाचार मिलते ही पूरे उत्तराखण्ड में शोक की लहर फैल गई. दिल्ली में उत्तराखण्ड भवन में कॉग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने उनकी देह पर फूल चढ़ाकर उन्हें अंतिम नमन किया. कॉग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा- उत्तराखण्ड में कॉग्रेस पार्टी की एक मज़बूत कड़ी, डॉ इंदिरा हृदयेश जी के निधन का दुखद समाचार मिला. वे अन्त तक जन सेवा एवं कॉग्रेस परिवार के लिए कार्यरत रहीं. उनके सामाजिक व राजनीतिक योगदान प्रेरणास्रोत हैं. उनके प्रियजनों को शोक संवेदनाएँ.
(Remembering Indira Hridayesh)
पूर्व मुख्यमन्त्री हरीश रावत ने अपने शोक संदेश में कहा- इंदिरा हृदयेश जी नहीं रही, सहसा इस समाचार पर विश्वास नहीं होता, कल तक हम साथ थे. कॉग्रेस को उत्तराखण्ड में कैसे मजबूत किया जाए? उसके लिए विचार विमर्श कर रहे थे, कार्य योजना बना रहे थे और अभी-अभी खबर आई है कि क्रूर काल ने इंदिरा हृदयेश जी को हमसे छीन लिया है. कॉग्रेस की मूर्धन्य नेता, एक अनूठा व्यक्तित्व, संसदीय विधा की मर्मज्ञ, संघर्षरत जनता व शिक्षकों की आवाज, हल्द्वानी व उत्तराखण्ड की जनता की एक लगनशील सेविका और कॉग्रेस की शीर्ष नेता इंदिरा हृदयेश जी, उनका जाना हम सबके लिए बहुत दु:खद है. उनके रिक्त स्थान को कोई नहीं भर सकता है. इंदिरा हृदयेश जी आप हम लोगों को हमेशा बहुत याद आएँगीं. आपने जो अविस्मरणीय कार्य अपने मंत्रितत्वकाल में किये हैं, जिस तरीके से उत्तर प्रदेश की विधान परिषद हो या शिक्षा जगत हो उसके लिए शिक्षक नेत्री के रूप में किया है, उसे कौन भुला सकता है. हल्द्वानी की विकास की आप माँ थी. कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि किन शब्दों में आपको मैं श्रद्धांजलि अर्पित करूँ. किन शब्दों में आपके परिवार को, हम सब भी आपके परिवार हैं, हम एक-दूसरे को संवेदना प्रेषित करें. भगवान को शायद यही मंजूर था कि आप हमको मझधार में छोड़कर के चले गई. जिस समय कॉग्रेस को आपसे मार्गदर्शन की सबसे अधिक आवश्यकता थी, उस समय आपका जाना बहुत कष्ट दे गया. इंदिरा जी आपका आशीर्वाद, हमेशा उत्तराखण्ड के कॉग्रेसजनों के साथ रहेगा इसका मुझे पूरा विश्वास है. मैं, अपने और अपने परिवार की ओर से, अपने कॉग्रेस परिवार व अपने उत्तराखण्ड के भाई-बहनों की ओर से, आपके लाखों प्रशंसकों जिनमें एक मैं भी हूं, आपको श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं.
मुख्यमन्त्री तीरथ सिंह रावत ने उनके निधन पर शोक जताते हुए ट्वीट करते हुए लिखा- उत्तराखण्ड राज्य की वरिष्ठ नेत्री, पूर्व मन्त्री एवं वर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष मेरी बड़ी बहन जैसी आदरणीय इंदिरा हृदयेश जी के निधन का दुखद समाचार मिला. मैं उनकी आत्मा की शान्ति के लिए भगवान के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूँ.
पूर्व मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट करके लिखा कि अभी-अभी कॉग्रेस की वरिष्ठ नेत्री डॉक्टर इंदिरा हृदयेश जी के निधन का दुःखद समाचार मिलकर मन अत्यन्त दुखी है. इन्दिरा बहिन जी ने अपने लम्बे राजनीतिक जीवन में कई पदों को सुशोभित किया और विधायिका के कार्य में पारंगतता हासिल की. बहिन जी का जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है.
उत्तराखण्ड कॉग्रेस कमेटी ने भी उनके निधन पर शोक जताया है और कहा कि पिछले चार दशक से उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखण्ड की राजनीति का बड़ा चेहरा कॉग्रेस पार्टी के लिए पूरा राजनीतिक जीवन समर्पित करने वाली एवम उत्तराखण्ड कॉग्रेस परिवार की वरिष्ठ सदस्य, नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश जी का उत्तराखण्ड सदन, दिल्ली में हुआ आकस्मिक निधन अत्यन्त पीड़ादायक है.
(Remembering Indira Hridayesh)
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त किया है. योगी ने ह्रदयेश के निधन पर गहरा दुःख प्रकट करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा- उत्तराखण्ड की वरिष्ठ नेता एवं सदन में नेता विपक्ष इंदिरा हृदयेश जी का निधन, अत्यंत दुखद! इंदिरा हृदयेश जी का जाना उत्तराखण्ड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है. शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदना. ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे. भावभीनी श्रद्धांजलि.
उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देते हुए राज्यसभा के सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि उनका जाना ऐसे समय में हुआ है जबकि राज्य व कॉग्रेस पार्टी को उनके नेतृत्व की बहुत जरूरत थी. दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रतीक, सामाजिक व राजनीतिक जीवन के हर क्षेत्र पर उनकी मज़बूत पकड़ थी. जिस समय महिलाओं की भागीदारी सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में न्यूनतम थी, उस समय उन्होंने सामाजिक व राजनीतिक जीवन में प्रवेश किया तथा प्रदेश के सामाजिक व राजनीतिक जीवन में अपना विशिष्ठ स्थान बनाया. उनके जाने से राज्य के सामाजिक व राजनीतिक जीवन में जो स्थान रिक्त हुआ है उसकी भरपाई होने में लम्बा वक्त लगेगा. कॉग्रेस के लिए तो यह एक अपूर्णीय क्षति है. मैं कल हल्द्वानी में उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करूँगा.
उत्तराखण्ड की कद्दावर नेता रही इंदिरा ह्रदयेश का जन्म 7 अप्रैल 1941 को अयोध्या में हुआ था. उन्होंने अपने संघर्षों से अपने लिए एक मुकाम बनाया था. वह हल्द्वानी के ललित महिला इंटर कॉलेज में पहले अध्यापक और उसके बाद प्रधानाचार्य रही. यहॉ प्रधानाचार्य रहने के दौरान ही उन्होंने शिक्षक राजनीति में प्रवेश किया और 1974 में पहली बार उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के प्रभावशाली ओमप्रकाश शर्मा गुट के समर्थन से विधानपरिषद् की शिक्षक निर्वाचन सीट से विधानपरिषद् ( एमएलसी) में पहुँचने में सफल रही. राज्यसभा की तरह ही विधानपरिषद् के सदस्यों का कार्यकाल भी 6 वर्षों का होता है. वह पहली बार 1974 से 1980 तक एमएलसी रही. उसके बाद 1986 से 1992 तक, फिर 1992 से 1998 तक और फिर 1998 से 8 नवम्बर 2000 तक उत्तर प्रदेश विधानपरिषद् की सदस्य रही. कॉग्रेस से जुड़ाव उनका राजनीति में आने से पहले से ही रहा.
9 नवम्बर 2000 को वह उत्तराखण्ड की अंतरिम विधानसभा में विधायक (एमएलए) के तौर पर शामिल रही और राज्य में मार्च 2002 में विधानसभा चुनाव होने तक अंतरिम विधानसभा की सदस्य रही. पहले विधानसभा चुनाव 2002 में वह हल्द्वानी से पहली बार विधायक चुनी गई . उन्होंने भाजपा की अंतरिम सरकार के मन्त्री बंशीधर भगत को हराया. कॉग्रेस सत्ता में आई तो नारायण दत्त तिवारी पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमन्त्री बने और इंदिरा ह्रदयेश लोकनिर्माण, विधायी एवं संसदीय कार्य तथा वित्त मन्त्री बनी. तिवारी मन्त्रिमंडल में वह सबसे अधिक ताकतवर मन्त्री रही. उन्हें तब सुपर मुख्यमन्त्री भी कहा जाता था. दूसरे विधानसभा चुनाव में 2007 में वह हल्द्वानी से ही भाजपा के बंशीधर भगत से चुनाव हार गई.
तीसरे विधानसभा चुनाव में 2012 में उन्होंने भाजपा की रेणु अधिकारी को हल्द्वानी सीट से चुनाव हराया और राज्य में कॉग्रेस की सरकार बनने पर वह पहले विजय बहुगुणा और उसके बाद हरीश रावत मन्त्रिमंडल में विधायी एवं संसदीय कार्य व वित्तमन्त्री रही. इन दोनों नेताओं के मुख्यमन्त्री काल में भी इंदिरा ह्ररदेश की सरकार से लेकर कॉग्रेस संगठन तक तूती बोलती थी. राज्य के 2017 में हुए चौथे विधानसभा चुनाव में कॉग्रेस तो सत्ता से बाहर हो गई, लेकिन इंदिरा ह्रदयेश हल्द्वानी से तीसरी बार विधायक बनने में सफल रही. इस बार उन्होंने भाजपा के डॉ. जोगेन्द्रपाल सिंह रौतेला को हराया. कॉग्रेस को केवल 11 सीटों पर ही विजय मिली. इंदिरा ह्रदयेश को कॉग्रेस ने विधायक दल का नेता बनाया और इस तरह वह नेता प्रतिपक्ष बनी और अपनी मृत्यु के दिन 13 जून 2021 तक इस पद पर रही.
(Remembering Indira Hridayesh)
काफल ट्री के नियमित सहयोगी जगमोहन रौतेला वरिष्ठ पत्रकार हैं और हल्द्वानी में रहते हैं. अपने धारदार लेखन और पैनी सामाजिक-राजनैतिक दृष्टि के लिए जाने जाते हैं.
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