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सत्य और अहिंसा का उपदेश देने वाले महावीर स्वामी का जन्मदिन है आज

आज महावीर जयंती है. महावीर जयंती चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्मदिन के दिन पर मनाई जाती है. महावीर स्वामी का जन्म चैत्र की शुक्ल त्रयोदशी दिन हुआ था. इस तरह इस वर्ष महावीर जयंती 17 अप्रैल, बुधवार के दिन है.

महावीर स्वामी का जन्म ज्ञातृक कुल के प्रधान सिद्धार्थ के घर में हुआ था. उनकी माता त्रिशला थी. जैन धर्म की मान्यताओं के अनुसार महावीर स्वामी का जन्म तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के निर्वाण के 188 वर्ष बाद हुआ था.

महावीर स्वामी का विवाह कलिंग के राजा की पुत्री यशोदा से हुआ था. यशोदा और वर्धमान की पुत्री का नाम प्रियदर्शनी था. महावीर स्वामी की पुत्री का विवाह जामिल से हुआ था. जामिल महावीर स्वामी का पहला अनुयायी था.

महावीर स्वामी के बचपन का नाम वर्धमान था . उन्होंने तीस वर्ष की उम्र में गृहत्याग किया था. बारह वर्षों के तप के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्ति हुई जिसे जैन धर्म में कैवल्य प्राप्ति कहा जाता है.

महावीर स्वामी को कैवल्य की प्राप्ति वैशाख शुक्ल दशमी के दिन ऋजुपालिका नदी के किनारे ‘साल वृक्ष’ के नीचे हुई थी.

महावीर स्वामी के अनेक नाम हैं- ‘अर्हत’, ‘जिन’, ‘निर्ग्रथ’, ‘महावीर’, ‘अतिवीर’ आदि। इनके ‘जिन’ नाम से ही आगे चलकर इस धर्म का नाम ‘जैन धर्म’ पड़ा.

महावीर जयंती के दिन जैन धर्म के अनुयायी महावीर स्वामी की प्रतिमाओं को विशेष स्न्नान करते हैं जिसे महावीर स्वामी का अभिषेक कहा जाता है. इसके बाद महावीर स्वामी की प्रतिमा सिहांसन या रथ पर बैठाकर भव्य जुलूस निकालते हैं.

महावीर स्वामी ने जैन धर्म के पहले से चले आ रहे चार व्रतों में पांचवां जोड़ा. यही वर्तमान में जैन धर्म के पंचव्रत हैं.

जैन धर्म से संबंधित भारत में प्रमुख मंदिरों में राजस्थान स्थित दिलवाड़ा मंदिर है. इसके अतिरिक्त पावापुरी जैन धर्म से संबंधित एक प्रमुख स्थल है यहां महावीर स्वामी की मृत्यु हुई थी. पावापुरी में ही महावीर स्वामी ने अपना अंतिम उपदेश दिया था.

– काफल ट्री डेस्क

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Girish Lohani

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