फोटो : पीटीआई
कल देश के कई हिस्सों में शराब की दुकानें खुलने के बाद सड़कों पर खूब भीड़ देखी गयी. उत्तराखंड के देहरादून और हल्द्वानी जैसी जगहों पर भीड़ अनियंत्रित भी हो गयी. शराब की दुकान खुलने के दुसरे दिन भी लोगों के उत्साह में कमी नहीं आई. (Liquor Sales After Lock-down In Uttarakhand)
आज का दिन ढलते-ढलते शराब की दुकानों के सामने भीड़ काफी कम हो चुकी थी. इसका एक कारण बहुत सी शराब का स्टॉक खत्म होना था. इस बीच कल के दिन शराब की बिक्री के चौकाने वाले आकड़ें भी सामने आ रहे हैं.
आबकारी विभाग की मानें तो बीते दिन माने 4 मई के दिन शराब की दुकानों के आगे दो-दो किमी लम्बी लाइनें देखने को मिली. एक ख़बर के अनुसार केवल देहरादून में ही 1 करोड़ 34 लाख की शराब की बिक्री हुई.
उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत अधिकाँश राज्यों से रिकार्ड तोड़ शराब की बिक्री की खबरें आ रहीं है. दिल्ली की सरकार ने इस मौके को भुनाते हुए शराब पर एमआरपी का 70 प्रतिशत टैक्स के रूप में लगा दिया है. आंध्रप्रदेश की सरकार ने अब तक सबसे ज्यादा 75% का टैक्स लगाया है. (Liquor Sales After Lock-down In Uttarakhand)
उत्तराखंड में अधिकाँश जिलों में महंगे ब्रांड खत्म होने की खबर भी आ रही है. खबरों में कहा जा रहा है कि दुकानों में अब घटिया शराब की बोटल ही बची हैं. शराब प्रेमी मज़बूरी में वही खरीद भी रहे हैं. (Liquor Sales After Lock-down In Uttarakhand)
शराब की बिक्री से आने वाला राजस्व उत्तराखंड सरकार की आय का एक मुख्य स्त्रोत है. पहले एक महीने में शराब की दुकानें बंद होने से सरकार के खजाने में भारी कमी की बात पहले से ही की जा रही थी.
इस बीच उत्तराखंड में नैनीताल जिले का एक वीडियो भी सोशियल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है. भयंकर ओलावृष्टि के बीच शराब के लिए खड़े लोगों के अनुशासन और संयम को लेकर सोशियल मीडिया में खूब चर्चा है. कोरोना वारियर नाम से सोशियल मीडिया में वायरल इस वीडियो को देखिये :
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
हाल ही में मेरी उत्तराखंड यात्रा, हरिद्वार, मसूरी, देहरादून और टिहरी, ने मुझे यह गहरा एहसास कराया कि…
रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के…
चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये…
2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय…
नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी…
देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत…