फोटो : अमित साह
हरियाणा पंजाब समेत पूरे उत्तर भारत में बैसाखी बड़े धूम-धाम से मनाई जाती है. बैसाखी के संबंध में यह माना जाता है कि आज ही के दिन सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविन्द सिंह ने आनन्दपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की स्थापना थी. खालसा पंथ की स्थापना का उदेश्य उस समय के मुग़ल शासकों के अत्याचार से लोगों की रक्षा करना था.
(Hemkund Sahib Uttarakhand)
बैसाखी एक कृषि पर्व के रूप में भी खूब मनाया जाता है. इस दिन तक रबी की फसल पाक जाती है उस उत्साह के कारण भी लोग बैसाखी उत्साह से मानते हैं. रबी के फसल पकने पर इस तरह के कृषि उत्सव पूरे देश में अलग अलग नामों से जाने जाते हैं. असम में बिहू, बंगाल में पोइला बैसाख, केरल में विशु रबी के फसल तैयार होने पर मनाये जाने वाले त्यौहार ही हैं.
उत्तराखंड में रीठा साहिब, हेमकुण्ड और नानकमत्ता तीन सबसे बड़े पवित्र सिख धर्म स्थल हैं. हेमकुण्ड सात बर्फीली पहाड़ियों के बीच में स्थित है. यह अक्टूबर से अप्रैल के बीच बंद रहता है. यहां स्थित झील वर्ष में आठ महिने बर्फ के रूप में जमी रहती है. लोकमान्यताओं के अनुसार सिखों के दसवें गुरु, गुरुगोविंद सिंह से यहां तप किया था.
सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह ने विचित्र नाटक के छठे भाग में लोकपाल-दंड पुष्करणी के बारे में लिखा –
हेमकुंड पर्वत है जहां, सप्तश्रृंग सोहत है वहां
तहां हम अधिक तपस्या साधी, महाकाल कालका आराधी.
1936 में संत सोहन सिंह ने अपने भाई वीर सिंह के सहयोग व सिख समुदाय के जोखिम भरे प्रबल प्रयासों से लोकपाल दंड पुष्करणी में झील के किनारे गुरु गोविन्द सिंह की तपस्या स्मृति के रूप में गुरूद्वारे की स्थापना कर डाली.
(Hemkund Sahib Uttarakhand)
हेमकुंड झील के विषय में अधिक जानकारी यहां देखें: बर्फ से ढकी सात पहाड़ियों के बीच हेमकुंड झील
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