फोटो: सुधीर कुमार
देवीधुरा में इस बरस का बग्वाल मेला शुरू हो चुका है. चार खामों के बीच खेली जाने वाली मुख्य बग्वाल इस साल 31 अगस्त के दिन खेली जानी है. पूर्णमासी को खेली जाने वाली देवीधुरा की बग्वाल एक तरह का पाषाण युद्ध होता है.
(Devidhura Bagval Mela 2023)
बग्वाल में भाग लेने के इच्छुक योद्धा अपने मुखियाओं के साथ निशान, ढोल, तुरही, शंख, घड़ियाल, नगाड़े लेकर देवीधुरा मंदिर प्रांगण पहुँचते हैं. हाथों में आत्मरक्षा के लिए बांस की छंतोलियाँ इन योद्धाओं को द्योका कहा जाता है. द्योका को बग्वाल से कुछ दिन पहले तक व्रत धारण कर अनेक नियमों का पालन करना होता है.
परंपरा के अनुसार चारों खाम के लोग देवीधुरा के मैदान में खड़े हो जाते हैं. पूर्वी कोने पर खड़े होते हैं गहड़वाल खाम के लोग. दक्षिणी कोने पर चम्याल खाम के लोगों का हुआ. पश्चिमी कोना हुआ वालिग़ खाम का और उत्तरी कोने पर लमगड़िया खाम के योद्धा मोर्चा संभालते हैं. पत्थर युद्ध के लिए ये चारों खाम महर और फड़त्याल में बंट जाते हैं.
(Devidhura Bagval Mela 2023)
बग्वाल के धार्मिक पक्ष के अतिरिक्त एक ऐतिहासिक पक्ष भी कहा जाता है. यह माना जाता है कि पहाड़ के राजाओं के पास इतना धन न था कि वह एक स्थायी सेना को रखें. धन के अतिरिक्त पहाड़ के शान्तिप्रिय समाज में स्थायी सेना रखने का सवाल न था. वर्षों में होने वाले किसी युद्ध में बतौर सैनिक सामान्य प्रजा ही लड़ा करती थी.
यह कहा जाता है कि बग्वाल एक किस्म का वार्षिक युद्ध अभ्यास ही था. इस युद्ध अभ्यास में प्रजा दो धड़ों में विभाजित हो जाती थी और युद्ध का अभ्यास करती. एक समय ऐसा भी था जब कुमाऊं के अनेक स्थानों पर बग्वाल खेली थी. वर्तमान में देवीधुरा की बग्वाल सबसे लोकप्रिय है.
(Devidhura Bagval Mela 2023)
बग्वाल से जुड़ी अधिक जानकारी यहां पढ़ें : काली कुमाऊँ के देवीधूरा की बग्वाल
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