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पहाड़ से आये लोग हल्द्वानी में सम्पन्न घरों के बजाय आम घरों में मेहमान बनना पसंद करते थे

सन 80 से पहले पहाड़ी क्षेत्रों को मैदानी क्षेत्रों से जोड़ने वाली यातातया व्यवस्था वर्तमान के मुकाबले बहुत ही कम…

7 years ago

काले कौआ : ले कौवा पुलेणी, मी कें दे भल-भल धुलेणी

पूस की कुड़कुड़ा देने वाली ठंड, कितना ही ओढ़ बिछा लो, पंखी, लोई लिपटा लो कुड़कुड़ाट बनी  रहती. नाक से भी…

7 years ago

ठांगर घेंटने का सगुर होना चाहिए

कौन बनेगा हमारा ठांगर? जिसमें हम लगूले, हरे-भरे से, ऊपर चढ़कर अपनी सफलता पर इतरायेंगे. फल देंगे और फिर एक…

7 years ago

उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता अपनी ही बुनियाद खोदने से शुरू होता है

उत्तराखंड में विदेश जा कर विकास का मॉडल देखने की खूब चर्चा है. चर्चा तो राज्य की प्रति व्यक्ति आय…

7 years ago

साठ के दशक में हल्द्वानी का समाज

सन् 1970 तक शादी-ब्याह की रस्में भी यहां ठेठ ग्रामीण परिवेश में ही हुआ करती थीं. न्योतिये प्रातः पहुँच जाते…

7 years ago

अल्मोड़ा के सिमतोला, कसार देवी और बिनसर में हुए ताज़ा हिमपात की तस्वीरें

2020 के पहले खूबसूरत हिमपात के बाद अल्मोड़ा के सिमतोला, कसार देवी और बिनसर का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता…

7 years ago

भय बिनु होय न प्रीति का पहाड़ी कनेक्शन – चेटक लगना

बचपन से कई ऐसे संवाद धार्मिक प्रसंगों में सुनते आये हैं जिनका आशय तो हम नहीं समझ पाते लेकिन अतार्किक…

7 years ago

नखलिस्तान – गीता गैरोला की कहानी स्मिता कर्नाटक की आवाज में

हमारी नियमित लेखिका गीता गैरोला ने आपको अनेक मनभावन कहानियां सुनाई हैं. हाल ही में हमने उनकी मशहूर किताब ‘मल्यो…

7 years ago

जब हल्द्वानी में लोग घरों के किवाड़ भी खुले रखते थे

सन् 1970 से पहले यहाँ बहुत से घरों में बिजली भी नहीं थी. 1956 में नैनीताल रोड पर डीजल पावर…

7 years ago

धारचूला के रं लोगों से सीखना चाहिए अपनी भाषा बोली का सम्मान करना

कोई भी संस्कृति अपनी भाषा बोली को संरक्षित किये बगैर लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकती. यह बात छोटी…

7 years ago