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‘कुमाँऊनी शब्द सम्पदा’ पुस्तक लोकभाषा को अभिसिंचित करने में सफल है

भाषाविदों के अनुसार कुमाँऊनी एक इंडो आर्यन भाषा है जो कुमाऊँ में प्रचलित है और अलग-अलग जनपदों में थोड़े बहुत…

4 years ago

तो गढ़वाल-कुमाऊं ही नहीं भारत-नेपाल को भी जोड़ती थी कंडी रोड

ऐतिहासिक सब माउंटेन रोड (कंडी रोड) विस्तार और इतिहास इस सड़क को ही आधार मानकर पर्वतीय और गैर पर्वतीय क्षेत्रों…

4 years ago

लोककथा : धौन पानी का भूत

धौन पानी क्षेत्र के एक गांव में तीन लोग रहते थे — सास, ससुर और बहू. सास और ससुर बहु…

4 years ago

इगास लोकपर्व को राजपत्र में स्थान मिलने के मायने

आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है. इक्कीस साल के उत्तराखण्ड में, इसके किसी लोकपर्व को पहली बार राजपत्र में…

4 years ago

गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की कविता: बाल दिवस विशेष

प्रख्यात जनधर्मी कलाकार-कवि के रूप में गिर्दा हमारे दिलों में अमर हैं. बाल दिवस पर सुनिये युवा कलाकार करन जोशी द्वारा…

4 years ago

तिवारीजी का झुनझुना बजाने में मस्त हैं आंदोलनकारी

आज एक बुजुर्ग से मुलाकात हुई तो उनके बाजार में आने का कारण यूं ही बस पूछ बैठा. इस पर…

4 years ago

उत्तराखण्ड की ग्रामीण महिलाओं में सामूहिक मेलजोल और उत्सवधर्मिता

सामान्यतः पहाड़ के गांव की महिलाओं के दैनिक जीवन का स्वरूप अत्यधिक व्यस्त और संघर्षमय  रहता है.  छह ऋतुओं, 12 महीने उनके…

4 years ago

माँ का जादुई बक्सा

हलवाई पांचवीं बार अपना हिसाब करने आया था. (Mother's Magic Box) —'तुम्हारा कितना हुआ भाई' पापा पांचवीं बार उससे पूछ…

4 years ago

पन्त-मटियानी के बेमेल युग्म का मिथक

इस किस्से की प्रामाणिकता का मैं दावा नहीं करता. बाकी लोगों की तरह मैंने भी इसे दूसरों के मुंह से…

4 years ago

वरिष्ठ व्यंग्यकार की आवश्यकता है

“अरी ऐ री आली!” “हाँ, सखी बोल!” “आली…” “सखी तू किंचित सी चिंतित प्रतीत होती है.” “किंचित नहीं आली, अत्यंत.…

4 years ago