संस्कृति

नए अंदाज में सुनिये कुमाऊनी होली मोहन गिरधारी

होली के जश्न में चार चाँद लगाती है कुमाऊनी होली 'हां, हां, हां, हां... मोहन गिरधारी... रूमानी छेड़छाड़ और चुहल…

6 years ago

इस बसंत गिर्दा की संगीतमय कविता का रस

कबूतरी देवी, भानुराम सुकोटी गिर्दा और हीरा सिंह राणा के सर्वकालिक लोकप्रिय गीतों को रीक्रियेट कर चुके करन जोशी के…

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अपनी दुधबोली से एक परिचय

कुमाऊनी भाषा उत्तराखंड के कुमाऊँ मण्डल के छह जनपदों में बोली जाती है. इसके अलावा देश के विभिन्न भागों में…

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घुघुत के अण्डों से ऐसे बने धरती और आकाश : कुमाऊंनी लोकगीत

कुमाऊंनी लोकसाहित्य में अनेकानेक पक्षियों का उल्लेख है. मोनाल, तीतरी, शुक, कव्वा, गौतेली, कफुआ, हुट-हुटिया आदि. लेकिन घुघुत का उल्लेख…

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नए साल में अमेरिका में धूम मचाने को तैयार ऐपण डिजाइन से सजी साड़ियां

उत्तराखण्ड की लुप्त होती पारंपरिक लोककलाओं के दौर में ही ऐपण के अच्छे दिन चल रहे हैं. कुमाऊं की चित्रकला…

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रैदास के वंशज हैं उत्तराखण्ड के दास

यूं तो हिंदी भाषा में दास शब्द का सामान्य अर्थ है किसी के अधीन रहने वाला सेवक नौकर— दास के…

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रामजन्म से उनकी जलसमाधि तक

हमरी सीता हैं रात अँजोरी तोहरे राम हैं कारा भँवरवा जब कवि अपनी बोली -भाषा या कहें कि मातृभाषा में…

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लोककथा : शेरू और श्याम

सावित्री ने आज घर पर ही रहने का फैसला किया. थकाऊ खेती के काम से आज उसे फुरसत मिली थी.…

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लोककथा : ह्यूंद की खातिर

पुरानी बात है जब दो वक्त की रोटी जुटाना ही बड़ी बात थी. उन्नत बीज और सही जानकारी न होने…

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लोककथा : दुबली का भूत

सम्पूर्ण हिमालयी क्षेत्रों में स्थायी निवास के साथ-साथ प्रायः एक अस्थाई निवास बनाने का चलन है, जिसे छानी या खेड़ा…

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