यात्रा पर्यटन

भयंकर बारिश के बीच गोरी नदी किनारे काली अंधेरी रात

सितम्बर में जाते मानसून के साथ हमने मिलम की दूसरी यात्रा शुरू की थी. जिस दिन हम पैदल चलना शुरू…

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मिलम ग्लेशियर का वह सफ़र जो आखिरी हो सकता था

मिलम, कहते हैं किसी समय अल्मोड़ा जिले के सबसे बड़े गांवों में एक गिना जाता था. यह इतना बड़ा था…

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मिलम में दम पीकर सैट अंग्रेज और छांग पीकर धुत्त पहाड़ी के झगड़े का किस्सा

पहली बार जोहार की यात्रा के लिए जब कमल दा के साथ निकला था तो मुझे कत्तई पता न था…

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छिपला जात में स्वर्ग जाने का रास्ता

छिपला के दक्षिणी ढाल में भैमण गुफा में सभी यात्री अँधेरे में ही जाग कर आगे की यात्रा के लिए…

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भैमण गुफा में अण्वाल की रसोई का लजीज आलू का थेचुवा और रोटियां

कनार में भगवती कोकिला के मंदिर में रात बिताने के बाद हम भुप्पी के घर मेहमान बने. कल हमने उनके…

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छिपला जात में कनार गांव के लोगों की कभी न भूलाने वाली मेहमाननवाजी

मलैनाथ की कथा में छिपलाकोट से भागश्री को भगा लाने का बड़ा ही रोमांचक प्रसंग आता है. मलैनाथ सीराकोट के…

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दारमा की अम्मा के नाम बेटे का बंद लिफ़ाफ़ा

जब हम सिनला की चढ़ाई पार कर रहे थे तो हमारे एक साथी की जेब में एक लिफाफा था. यह…

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डेढ़ जूता और ठाणी की धार

तवाघाट से मांगती के बीच सड़क टूटी थी तो हमें तवाघाट से ठाणी धार चढ़कर चौदास होते हुए आगे बढ़ना…

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अन्वालों के डेरे और ब्रह्मकमल का बगीचा

अंग्रेज भले हमें सालों गुलाम बना कर गए हों उनके प्रति हमारा आकर्षण कभी कम नहीं हुआ. जैसे ही हमें…

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सिनला की चढ़ाई और सात थाली भात

पंद्रह अगस्त का दिन, बचपन से ही हमारे लिए उल्लास और उत्साह का दिन. लेकिन इस बार की पंद्रह अगस्त…

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