कॉलम

अद्भुत है मां पूर्णागिरी धाम की यह कथा

11 मार्च बुधवार को विधि विधान के साथ टनकपुर में ठुलीगाढ़ प्रवेश द्वार में स्थित माँ पूर्णागिरि धाम के कपाट…

6 years ago

अब होली जैसी होली नहीं बची पहाड़ों में

होली आने वाली है ये सोचकर ही इस साल मन में काफी उत्साह था क्योंकि बचपन की होली की तस्वीर…

6 years ago

शिक्षा जगत का बैल और खेतों का विद्यार्थी उर्फ़ भैया जी

हम सब उम्र के उस दौर में थे जिसे वय:संधि कहते हैं और जिसके वर्णन के बहाने पुराने कवियों ने…

6 years ago

ओएशडी सैप कह लो चाहे निजी शचिव कह लो – नीश हर जगह होने वाले हुए उत्राखंड में

उसने अपनी फुलौड़ी नाक को ज़रा सा टेढ़ीयाया और बोला- 'वरफ़ारी हो रई वरफ़ारी' (Personal Secretaries of Modern Politicians Satire)…

6 years ago

फूल बन कर खिलने वाली पर्वतपुत्री है फ्यूंली

गढ़वाल में चैत के महीने में गाए जाने वाले लोकगीत चैती कहलाते हैं. अधिकतर लोकगीतों का वर्ण्य विषय लोकगाथाएँ होती…

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महाराष्ट्र के राजभवन में उत्तराखंड का लोक पर्व फूलदेई

इस बार हिमालयी फूलदेई पर्व की धूम समुद्र के तट पर भी खूब रही. इस वर्ष महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत…

6 years ago

द्वार पूजा का पर्व भी है फूलदेई

उत्तराखण्डियों का बालपर्व - फूलदेई सनातनी संस्कृति में घर का द्वार केवल घर में प्रवेश करने का रास्ता न होकर…

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बसंत के इस्तकबाल का त्यौहार है फूलदेई

ऋतुराज बसंत का स्वागत उत्तराखण्ड को देवभूमि के साथ उत्सवों की भी भूमि कहा जाय तो गलत नहीं होगा. यहाँ…

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फुलदेई : बसंत-पुजारी पहाड़ी बच्चों की आस का पर्व

बसंत पंचमी से प्रारम्भ बसंत मैदानी क्षेत्र में होली के साथ विदा ले लेता है पर पहाड़ में ये बैसाखी…

6 years ago

फूलदेई छम्मा देई दैण द्वार भरी भकार

मनुष्य का जीवन प्रकृति के साथ अत्यंत निकटता से जुड़ा है. पहाड़ के उच्च शिखर, पेड़-पौंधे, फूल-पत्तियां, नदी-नाले और जंगल…

6 years ago