आपको मुनस्यारी की दुर्लभ राजमा कि तलाश है या फिर कुमाऊं-गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों…
खड़कमाफी के जंगलों और आबादी के बीच पिछले लगभग एक दशक से एक परिचित छाया विचरती रही है—एकदंत गजराज. अब…
हाल ही में मेरी उत्तराखंड यात्रा, हरिद्वार, मसूरी, देहरादून और टिहरी, ने मुझे यह गहरा एहसास कराया कि यह भू-दृश्य अपनी पारिस्थितिक वहन…
रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के पनघट पर पहुँचीं, तो अचानक सुबनी…
चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये जाते हैं. चीड़ के तने…
2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय कार्य किया है. 140 रुपये…
नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी के पास अमेरिका चला गया.…
देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत दिला रहा है. मनिला डांडे…
पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का…
मानव और प्रकृति का संबंध अत्यंत प्राचीन, गहरा और अविभाज्य है. प्रकृति तथा वायुमंडल से मिलकर बने पर्यावरण के विभिन्न तत्व—जैसे…