Featured

पिथौरागढ़ का प्राचीन इतिहास

आज हम जिस शांत और सुरम्य पिथौरागढ़ जिले को देखते हैं, उसका इतिहास सदियों पुराना और बेहद रोमांचक रहा है. कत्यूरी राजाओं के वैभव से लेकर अस्कोट के पाल राजाओं और सिरा के मल्ल राजाओं के संघर्षों तक, इस सीमांत क्षेत्र ने कई ऐतिहासिक साम्राज्यों का उत्थान और पतन देखा है. 1979 के आधिकारिक गजेटियर के अनुसार, आइए जानते हैं पिथौरागढ़ के इस गौरवशाली प्राचीन सफर को.

1. पौराणिक शुरुआत और आदि-निवासी

पिथौरागढ़ क्षेत्र का सबसे पहला जिक्र लोक-कथाओं और हमारे पौराणिक ग्रंथों में मिलता है. स्कंदपुराण के ‘मानसखंड’ में इस क्षेत्र की पवित्र नदियों, घाटियों और कैलाश-मानसरोवर जैसे ऊँचे पर्वतों का पूरे सम्मान के साथ वर्णन किया गया है.

अगर यहाँ के सबसे पहले निवासियों की बात करें, तो इस पहाड़ी क्षेत्र पर सबसे पहले किरात’ (Kiratas) जनजाति का राज था. इन्हें यहाँ का आदि-निवासी माना जाता है. समय के साथ यहाँ खस’ (Khasas) और अन्य जनजातियाँ भी आकर बसीं, जिन्होंने इस सुंदर घाटी की प्रारंभिक सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था की नींव रखी.

2. कत्यूरी राजवंश: संगठित इतिहास का स्वर्णिम काल

पिथौरागढ़ और पूरे कुमाऊं क्षेत्र के प्रामाणिक इतिहास की शुरुआत कत्यूरी राजवंश (Katyuri Dynasty) के साथ होती है. कत्यूरी राजाओं ने एक बहुत बड़े साम्राज्य पर राज किया था. शुरुआत में उनकी राजधानी जोशीमठ (चमोली) थी, जिसे बाद में उन्होंने अल्मोड़ा की कत्यूर घाटी (बैजनाथ) में स्थानांतरित कर दिया था.

इस शक्तिशाली साम्राज्य के दौरान पिथौरागढ़ का पूरा इलाका उनके सीधे नियंत्रण में था. कत्यूरी शासक अपनी धार्मिक सहिष्णुता और कला-प्रेमी स्वभाव के लिए जाने जाते थे. इसी दौर में पिथौरागढ़ में भव्य शिव और विष्णु मंदिरों का निर्माण हुआ और वास्तुकला को एक नई ऊँचाई मिली.

3. साम्राज्य का बिखराव और स्थानीय राजाओं का उदय

11वीं और 12वीं शताब्दी के आते-आते केंद्रीय कत्यूरी सत्ता कमजोर होने लगी. नतीजा यह हुआ कि यह विशाल साम्राज्य कई छोटी-छोटी शाखाओं में टूट गया. इसके बाद पिथौरागढ़ के अलग-अलग हिस्सों में कई स्थानीय राजवंशों का उदय हुआ, जिनमें से तीन प्रमुख थे:

  • अस्कोट का पाल राजवंश: कत्यूरी साम्राज्य के बिखरने के बाद, कत्यूरी वंश के ही एक वंशज अभय पाल’ (Abhai Pal) ने साल 1279 ईस्वी में अस्कोट में एक स्वतंत्र राज्य स्थापित किया. इन्हें ‘पाल राजा’ कहा गया. उन्होंने अपनी आजादी को बचाए रखने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ कई संधियाँ और युद्ध किए.
  • सिरा का मल्ल राजवंश: पिथौरागढ़ का ‘सिरा’ क्षेत्र (जिसे आज हम डीडीहाट के नाम से जानते हैं) नेपाल के डोटी साम्राज्य के मल्ल राजाओं के प्रभाव में आ गया था. मल्ल राजाओं ने सिरा को अपनी एक महत्वपूर्ण प्रांतीय राजधानी बनाया. यहाँ के शासकों को रैका राजा’ (Raika Kings) भी कहा जाता था. अपनी उपजाऊ भूमि के कारण यह क्षेत्र हमेशा राजाओं के बीच टकराव का केंद्र रहा.
  • सोर घाटी के बम राजा: वर्तमान पिथौरागढ़ शहर और उसके आसपास के मैदानी भाग को प्राचीन काल में ‘सोर’ या ‘सोर घाटी’ कहा जाता था. कत्यूरियों के बाद यहाँ स्थानीय सरदारों और ‘बम राजाओं’ (Bam Kings) का शासन रहा, जो बाद में डोटी साम्राज्य के जागीरदार बन गए.

4. कैसी थी उस दौर की शासन व्यवस्था?

उस प्राचीन काल में सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा थी. इसलिए राजाओं और स्थानीय सामंतों ने ऊँची-ऊँची पहाड़ियों पर कोट’ (मजबूत किले) बनवाए थे, जहाँ से पूरे इलाके पर नजर रखी जाती थी और शासन चलाया जाता था.

इसके अलावा, इतिहास हमें बताता है कि ये राजा धार्मिक कार्यों में गहरी रुचि रखते थे. तालेश्वर, गंगोलीहाट और सोर घाटी के कई प्राचीन मंदिरों के लिए राजाओं ने बड़ी मात्रा में भूमि दान (जिसे गुंठ भूमि कहा जाता था) दी थी, जिसका प्रमाण हमें उस दौर के ताम्रपत्रों (Copper Plates) और प्राचीन अभिलेखों से मिलता है.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

2 days ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

5 days ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

5 days ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

5 days ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

5 days ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

5 days ago