लड़कियों के बाप

8 years ago

विष्णु खरे समकालीन सृजन परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण नाम रहे. मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 9 फरवरी 1940 को जन्मे विष्णु…

अथ टार्च, लालटेन, लम्फू और ग्यस कथा

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तब टार्च, लालटेन व लैम्फू के बिना अधूरा था जीवन -जगमोहन रौतेला आजकल तो भाबर में अब शहर तो छोड़िए…

काल से होड़ लेता था कवि विष्णु खरे

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पहल के ताज़ा अंक में अपनी डायरी की शुरुआत में विष्णु खरे की कविता, ‘एक कम’ की आख़िरी चार लाइनों…

अभावों से अर्जुन अवार्ड तक का सफ़र

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उत्तराखंड के औद्योगिक शहर रुद्रपुर के निवासी पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार का नाम साल 2018 के अर्जुन अवार्ड प्राप्त करने…

बार-बार अपनी जड़ों की ओर क्यों उगते हैं बंबई के डेढ़ यार

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अल्मोड़ा से बम्बई चले डेढ़ यार – तीसरी क़िस्त कठोपनिषद की तीसरी वल्ली (अध्याय) का पहला मंत्र है: ऊर्ध्व्मूलोSवक्शाख एशोSश्वत्थः…

गुप्त वंश तथा कुमाऊं भाग-3

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तोरमाणः- सन् पांच सौ ई. के लगभग हूण सरदार तोरमाण ने मालवा तक अपना शासन स्थापित किया और महाराजाधिराज की…

सरयू आज भी सिसकती है – कुसुमा की त्रासद लोककथा

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सुसाट मन को कपोरता है. लग जाता है एक उदेख जिसके अंदर कुहरा जाती है बाली कुसुमा की ओसिल कहानी.…

मेरी नानी हिमालय पर मूंग दल रही है

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रमाशंकर यादव 'विद्रोही' (3 दिसम्बर 1957 - 8 दिसंबर 2015) हिंदी के लोकप्रिय जनकवि हैं. वे स्नातकोत्तर छात्र के रूप…

बाली उमर का सिनेमा प्रेम और सच बोलने का कीड़ा

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लड़के, पढ़ने के लिए देहात से शहर जाते थे. आसपास के इलाकों में अव्वल तो कोई इंटर कॉलेज नहीं था.…

शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 15

8 years ago

पहला दखल वो एक नम सुबह थी. ये बताना मुश्किल है कि कल रात की ओस ने देवदार की गहरी…